डीजल पर घाटा खत्म, अब 35 पैसे का मुनाफा
डीजलकी बिक्री पर कंपनियों का नुकसान अब खत्म हो गया है। इसके उलट उन्हें प्रति लीटर 35 पैसे का फायदा है। हालांकि अभी वे दाम नहीं घटाएंगी क्योंकि सरकार ने इसकी कीमत नियंत्रण मुक्त करने पर कोई फैसला नहीं किया है। एक अधिकारी ने बताया कि पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अभी सरकारी यात्रा पर वियतनाम में हैं। नियंत्रण मुक्त करने का फैसला उनकी वापसी के बाद ही होगा। ऐसा संभवत: पहली बार है जब डीजल की घरेलू कीमत अंतरराष्ट्रीय कीमत से ज्यादा है। अगर कंपनियां दाम घटाती हैं तो पांच साल से ज्यादा समय में ऐसा पहली बार होगा। इससे पहले 29 जनवरी 2009 को डीजल दो रुपये लीटर सस्ता किया गया था। आईसीआईसीआई सिक्युरिटीज के विश्लेषक रोहित आहूजा ने बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए मौजूदा स्थिति अच्छी बात है। उनकी 55 फीसदी आमदनी डीजल से होती है। डीजल पर मुनाफे का मतलब है कि उनका मुनाफा बढ़ेगा।
पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी में बताया गया है कि डीजल पर 16 सितम्बर से शुरू पखवाड़े में अंडर रिकवरी खत्म होकर 35 पैसे प्रति लीटर की ओवर रिकवरी हो रही है। एक सितम्बर को शुरू पखवाड़े में कंपनियों को आठ पैसे प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा था।
पेट्रोलपर भी फैसला टला
अंतरराष्ट्रीयबाजार के अनुरूप कंपनियों को पेट्रोल की कीमत 54 पैसे बढ़ानी है। अगस्त के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल की बेंचमार्क कीमत 109.25 डॉलर प्रति बैरल थी जो सितंबर में बढ़कर 111.04 डॉलर हो गई। लेकिन इस पर अमल भी फिलहाल मुल्तवी कर दिया गया है। उक्त अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव को देखते हुए अभी संभवत: कीमत बढ़ाई जाए। डीजल को नियंत्रण मुक्त करने पर भी फैसला तभी होने के आसार हैं। पेट्रोल-डीजल कीमत की अगली समीक्षा अब सितंबर के अंत में होगी।
डीजलके भी घटेंगे-बढ़ेंगे दाम
सरकारने पेट्रोल को 2010 में नियंत्रण मुक्त कर दिया था। इसकी कीमत बाजार तय करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के हिसाब से घरेलू बाजार में भी पेट्रोल की कीमत घटती या बढ़ती है। डीजल के साथ ऐसा नहीं है। इसकी बिक्री पर कंपनियों को घाटा हो रहा था। इसलिए जनवरी 2013 में इसकी कीमत हर माह 50 पैसे बढ़ाने का निर्णय लिया गया था।
डीजल को नियंत्रण मुक्त करने के बाद इसकी कीमत भी पेट्रोल की तरह घट-बढ़ सकेगी।