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एनएसईएल का विलय नहीं चाहती एफटीआईएल

7 वर्ष पहले
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घोटालेमें फंसा नेशनल स्पॉट एक्सचेंज (एनएसईएल) अब सबके गले की हड्डी बनता जा रहा है। वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) ने प्रस्ताव दिया कि इसका जिग्नेश शाह प्रवर्तित फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज (एफटीआईएल) में विलय कर दिया जाए। इससे घोटाले में फंसी रकम की जल्दी वसूली की जा सकेगी। लेकिन एफटीआईएल ने इसका विरोध किया है। कंपनी ने कहा है कि इससे इसके 60,000 शेयरधारक, 1000 से ज्यादा कर्मचारी और कर्जदाता प्रभावित होंगे। कंपनी ने सलाह दी है कि सरकारी एजेंसियों, ब्रोकरों और ट्रेडिंग क्लायंट को मिलकर एनएसईएल के 24 डिफॉल्टरों से रिकवरी सुनिश्चित करनी चाहिए।

पिछले साल एनएसईएल में 5,500 करोड़ रुपये का भुगतान संकट सामने आया था। एनएसईएल, एफटीआईएल द्वारा प्रवर्तित कंपनी थी। घोटाले के बाद नियामक एफएमसी ने एफटीआईएल को किसी भी एक्सचेंज में होल्डिंग रखने के लिए अनुचित करार दिया था। इसके बाद इसे कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स से बाहर निकलना पड़ा। स्टॉक एक्सचेंज एमसीएक्स-एसएक्स के प्रबंधन का नियंत्रण भी इसके हाथ से चला गया।

एफटीआईएल ने विलय प्रस्ताव के खिलाफ बीएसई और एनएसई को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है एनएसईएल का मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है। सरकार जनहित में दो कंपनियों का विलय कर सकती है, लेकिन एनएसईएल प्लैटफॉर्म पर ट्रेडिंग करने वाले ब्रोकरों के 13,000 क्लायंट को जनहित नहीं कहा जा सकता। इन लोगों ने ज्यादा रिटर्न की उम्मीद में ट्रेडिंग की थी। बकाया रकम का 66 फीसदी 781 लोगों के पास है। एफटीआईएल ने कहा है कि इसने 6,600 छोटे निवेशकों के बकाए का आंशिक भुगतान करने के लिए एनएसईएल को 179 करोड़ का कर्ज भी दिया है।

प्रशासनिक और कानूनी खर्चों में भी मदद की है। एफटीआईएल ने बताया है कि एनएसईएल ने अब तक 24 डिफॉल्टरों से 360 करोड़ की रिकवरी की है। यह रकम निवेशकों को उनके निवेश के अनुपात में लौटा दी गई है।