पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • पेट्रोकेमिकल पर आयात शुल्क तर्कसंगत हो : एसोचैम

पेट्रोकेमिकल पर आयात शुल्क तर्कसंगत हो : एसोचैम

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
उद्योगसंगठन एसोचैम ने पेट्रोकेमिकल उद्योग को उतार-चढ़ाव वाले कर ढांचे से बचाने के लिए इसके उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने की मांग की है। एसोचैम ने यहां जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि पेट्रोकेमिकल उद्योग के लिए कच्चा माल जैसे नैप्था, तरल प्राकृतिक गैस तथा प्रोपेन आदि पर आयात शुल्क ज्यादा है। दूसरी ओर इनसे तैयार उत्पादों इथिलीन, प्रोपिलीन, बेंजीन, ब्यूटाडाइन, पॉलीमर तथा इत्र आदि पर शुल्क बेहद कम है। इससे देश के उद्योगों को आयातित उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है। अध्ययन में कहा गया है कि छह राष्ट्रों की खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार संधि (एफटीए) पर हस्ताक्षर करने से आयात में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। इससे देश का व्यापार घाटा और बढ़ जाएगा। एसोचैम ने पेट्रोकेमिकल उद्योगों के लिए कच्चे माल के स्रोत के रूप में अन्य विकल्प तलाशने की भी सलाह दी है। उसका कहना है कि कोयला तथा जैव ईंधन इनके वैकल्पिक स्रोत हो सकते हैं।

अध्ययन में इस क्षेत्र की कंपनियों को अपने उत्पादों के दाम दक्षिण पूर्व एशिया के बाजारों के अनुरूप रखने की सलाह दी गयी है ताकि लगभग के बराबर आयात शुल्क से उनकी बिक्री पर असर पड़े। रिपोर्ट के मुताबिक नैप्था का निर्यातक होने के बावजूद कम आयात शुल्क होने के कारण भारत इससे बने पदार्थों, जैसे पॉलीमर का बड़ी मात्रा में आयात करता है। वर्ष 2001-02 के दौरान पॉलीमर पर आयात शुल्क 40 प्रतिशत था जो वर्ष 2007-08 में घटकर महज पांच प्रतिशत रह गया। इससे आयात में भारी बढ़ोतरी हुई है। भारत के पांच प्रतिशत के मुकाबले मलेशिया (20 से 30 प्रतिशत), फिलिपींस (15 प्रतिशत), इंडोनेशिया (20 प्रतिशत) और चीन (6.5 से 8.4 प्रतिशत) में शुल्क ज्यादा है।