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एमटीएनएल-बीएसएनएल के विलय पर पीएमओ का ब्रेक

7 वर्ष पहले
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सरकारकी दो टेलीकॉम कंपनियों, बीएसएनएल और एमटीएनएल के विलय को लेकर चल रही लंबी मशक्कत एक नए तरह के अंत की ओर जा रही है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन दोनों सरकारी कंपनियों के विलय को लेकर नाखुशी जताते हुए कहा है कि इन दोनों को अलग कंपनियों के तौर पर ही कारोबार करने दिया जाए। हालांकि, इसके साथ ही उसने बीएसएनएल के आर्थिक घाटे को पूरा करने के लिए एक नए तरह के प्लान पर विचार की भी अनुशंसा की है। इसके तहत उसके मौजूदा ऑप्टीकल फाइबर नेटवर्क को दूरसंचार विभाग या देश के ढाई लाख गांव तक ब्रॉडबैंड पहुंचाने के लिए गठित कंपनी बीबीएनएल की ओर से खरीदने का प्रस्ताव है। इसके बदले बीएसएनएल को करीब 35 हजार करोड़ रुपए तक मिल सकेंगे और इससे वह अपनी आर्थिक दशा ठीक करेगा।

असल में, इन दोनों कंपनियों के विलय का प्रस्ताव पूर्व की यूपीए सरकार के एजेंडा में सबसे उपर था। लेकिन इस विलय की राह में कुछ व्यवहारिक समस्याएं थीं। इसमें बीएसएनएल में तैनात आईटीएस अफसरों को दिया जाने वाला पैसा, इसके कर्मियों के पेंशन के मद में खर्च होने वाली राशि और इसके भूमि के बेहतर प्रबंधन का मसला शामिल था। इसके अलावा एमटीएनएल और बीएसएनएल के विलय में एक समस्या यह थी कि एमटीएनएल शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी है जबकि बीएसएनएल सूचीबद्ध नहीं है। ऐसे में इसके शेयरधारकों से इसकी संस्तुति भी हासिल करनी होगी।

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