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52 जरूरी दवाएं होंगी सस्ती, मूल्य नियंत्रण दायरे में आईं
सरकारनेआवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए 52 नई दवाओं को मूल्य नियंत्रण प्रणाली के दायरे में ला दिया है। इनमें कुछ आमतौर पर काम में आने वाली दर्दनिवारक एंटीबायोटिक दवाएं हैं। इसके अलावा कैंसर त्वचा रोगों के इलाज में काम आने वाली कुछ दवाओं को भी इसके दायरे में लाया गया है। इस तरह अब 450 से अधिक दवाएं राष्ट्रीय दवा मूल्य प्राधिकरण (एनपीपीए) द्वारा संचालित मूल्य नियंत्रण प्रणाली (पीसीएम) के तहत गई हैं।
यह प्राधिकरण देश में ऐसी दवाओं की कीमत आदि तय करता है। उद्योग जगत के सूत्रों के मुताबिक सरकार के इस कदम से प्रभावित होने वाली प्रमुख दवा कंपनियों में ल्यूपिन, कैडिला मर्क शामिल हैं।
पीसीएम के तहत आने वाली दवाओं और उनके फॉर्म्यूलेशन की जानकारी एनपीपीए की वेबसाइट पर उपलब्ध है। गौरतलब है कि इससे पहले एनपीपीए सितंबर में 43 दवाओं को पीसीएम के दायरे में लाया था। इनमें एंटीबायोटिक सिप्रोफ्लोक्सासिन, बीसीजी वैक्सीन और एंटी-डायबेटिक मेटफोरमिन से बनने वाली दवाएं शामिल हैं।
जुलाई में भी एनपीपीए ने आम जनता को राहत देने के लिए 108 गैर-आवश्यक दवाओं के दाम नियंत्रित किए थे। हालांकि बाद में यह आदेश वापस ले लिया गया था।