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रेलवे ने रैन बसेरों के लिए जमीन देने से किया इनकार

7 वर्ष पहले
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रेलवे ने रैन बसेरों के लिए जमीन देने से किया इनकार

नई दिल्ली | रेलवेने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा है कि यहां स्टेशनों के पास उसकी जमीन बेघरों के रैन बसेरे बनाने के लिए उपलब्ध नहीं है क्योंकि वहां रहने वाले लोग ठंड से नहीं मरेंगे, बल्कि असावधानी से रेल पटरी पार करते समय मारे जाएंगे। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ की पीठ का विचार है कि इस साल ठंड के मौसम में राष्ट्रीय राजधानी में कोई भी व्यक्ति ठंड से नहीं मरना चाहिए या सड़क किनारे सोते नहीं पाया जाना चाहिए। अदालत ने डीडीए, दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत ढांचा विकास निगम लिमिटेड, एमसीडी, एनडीएमसी, छावनी बोर्ड और भूमि एवं विकास कार्यालय को तमाम इंतजाम करने का निर्देश देते हुए कहा,‘हम जगह को लेकर और कंबल या रात में बेघरों को दिए जाने वाले बिस्तर को लेकर चिंतित नहीं है। हम कुल मिलाकर यही चाहते हैं कि इस साल सर्दियों में कोई भी सड़क पर ना सोए।’ हालांकि, दिल्ली शहरी आवास सुधार बोर्ड के वकील द्बारा अपनी परियोजना में रेल अधिकारियों के सहयोग नहीं किए जाने का सवाल उठाए जाने पर उत्तर रेलवे के वकील ने कहा,‘रेलवे स्टेशनों के पास की जगह बेघरों के लिए उपलब्ध नहीं कराई जा सकती क्योंकि वे असावधानी से रेल पटरी पार करेंगे और मारे जाएंगे।’