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गरीब व्यक्ति और संविधान को ध्यान में रखें अधिकारी:प्रणब

7 वर्ष पहले
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नेशनल ब्यूरो | नई दिल्ली. मसूरीमेंभारतीय प्रशासनिक सेवा के नए अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हम देश के लोगों को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम सभी के लिए समानता और स्वतंत्रता तथा समान दर्जा एवं अवसर मुहैया करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कोई भी धर्म अपनाने, आस्था और उपासना की स्वतंत्रता है। हमने व्यक्ति की गरिमा और इस महान देश की एकता एवं अखंडता सुनिश्चित की है। मुखर्जी ने नए अधिकारियों को संविधान की प्रस्तावना में दिए इन महत्वपूर्ण आश्वासनों को सर्विस के दौरान लागू करने को कहा।राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान सब के लिए न्याय, स्वतंत्रता और समानता की गारंटी देता हैं। उन्होंने यह संदेश मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में सिविल सेवकों के 89वें बैच के पासिंग आउट समारोह में दिया।

प्रशासनिक सेवा की शुरुआत करने जा रहे युवा अधिकारियों से मुखर्जी ने कहा कि किसी भी नागरिक सेवा का आखिरी उद्देश्य देश के संविधान के मुताबिक सेवा करना है क्योंकि इस संविधान को स्वयं देश के लोगों ने अपने लिए बनाया है।



राष्ट्रपति ने कहा कि आजादी के बाद जब भारत ने संसदीय लोकतंत्र का रास्ता चुना तब कई लोगों ने यह संदेह जताया था कि 18 प्रतिशत की साक्षरता वाला और अपनी खाद्य आपूर्ति के लिए आयात पर निर्भर रहने वाला यह देश संसदीय लोकतंत्र कैसे लागू करेगा।

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद उन सिविल सेवकों के भविष्य पर भी चर्चा छिड़ गई थी जिन्होंने अग्रेजों की नौकरी की थी। लेकिन तब सरदार बल्लभ भाई पटेल ने सिविल सेवकों को बेहतरीन औजार बताया था और कहा था कि यह राजनीतिक आकाओं पर निर्भर है कि वे सर्वश्रेष्ठ संभावित तरीके अधिकारियों का इस्तेमाल कैसे करते हैं।