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फडणवीस ने दिए अजीत के खिलाफ जांच के आदेश

7 वर्ष पहले
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महाराष्ट्रके पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार समेत राकांपा के तीन शीर्ष नेता भ्रष्टाचार के आरोपों में राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की खुली जांच का सामना करेंगे।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार के साथ ही राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और छगन भुजबल के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार और जल संसाधन मंत्रियों के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के अमल में अनियमितता के आरोपों में जांच शुरू करने की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को अनुमति दे दी है।

मुख्यमंत्री ने पूर्व लोक निर्माण विभाग मंत्री छगन भुजबल के खिलाफ नई दिल्ली में महाराष्ट्र सदन और मुंबई में निजी सार्वजनिक भागीदारी में दो अन्य सरकारी भवनों के निर्माण में कथित भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपों की खुली जांच करने के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। सरकार ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ भी कथित अनियमितताओं के सिलसिले में जांच का आदेश दिया है। महाधिवक्ता सुनील मनोहर ने बंबई उच्च न्यायालय नेे कहा कि मुझे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने यह बताने के लिए अधिकृत किया है कि अजित पवार, सुनील तटकरे और छगन भुजबल के खिलाफ एसीबी जांच की मंजूरी दे दी गई है।

मनोहर ने कहा कि फडणवीस ने एसीबी को कथित घोटालों के मामले में राकांपा के तीन शीर्ष नेताओं के खिलाफ जांच पर आगे बढ़ने का निर्देश दिया है। इन घोटालों में लोभी ठेकेदारों और अधिकारियों की कथित साठगांठ से कई हजार करोड़ रुपये का घपला किया गया। न्यायमूर्ति भूषण गवई और न्यायमूर्ति वी एम देशपांडे की एक पीठ ने महाधिवक्ता का बयान दर्ज किया और जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने कहा कि जब बड़े लोगों के साथ अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ जांच की जा रही हो तो इन याचिकाओं को लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं हैं। अदालत ने साफ कर दिया कि याचिकाकर्ता अगर जांच से संतुष्ट नहीं होंगे तो वे फिर उसके पास सकते हैं।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पवार और तटकरे के खिलाफ सिंचाई घोटाले में और भुजबल के खिलाफ महाराष्ट्र सदन घोटाले में खुली जांच का प्रस्ताव दिया था। सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अजित पवार ने कहा कि उन्हें जांच से कोई समस्या नहीं है और सच्चाई सामने जाएगी। पवार ने कह