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एटमी हादसा होने पर विदेशी कंपनियों पर नहीं कर सकेंगे मुकदमा

6 वर्ष पहले
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सरकारने साफ कर दिया है कि भारत का परमाणु जवाबदेही कानून नहीं बदला जाएगा। लेकिन एटमी दुर्घटना होने पर परमाणु रिएक्टर सप्लाइ करने वाली किसी विदेशी कंपनी पर पीड़ित मुकदमा नहीं कर सकेंगे। हालांकि, रिएक्टर का संचालन करने वाली कंपनी क्षतिपूर्ति का दावा कर सकेंगी। आम आदमी पर इसका कोई बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार ने अमेरिका के साथ हुए एटमी करार की जानकारी सार्वजनिक की है। परमाणु दुर्घटना के संबंध में नागरिक दायित्व, क्षतिपूर्ति और दावे के विषय में विदेश मंत्रालय ने सात पेज में यह जानकारी दी। इसका शीर्षक है- “प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्न’। मामले में नीतिगत अड़चनें दूर करने के लिए भारत-अमेरिका परमाणु संपर्क समूह के बीच तीन दौर की बातचीत के बाद सहमति बनी है। इसकी अंतिम बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा से तीन दिन पहले लंदन में हुई थी। ओबामा 25 जनवरी को भारत पहुंचे थे। इसके बाद अमेरिका के साथ असैन्य परमाणु सहयोग के दो लंबित मुद्दों पर सहमति बनी। शेषपेज|4





प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी और ओबामा ने 25 जनवरी 2015 को इसकी पुष्टि की।

समझौतेकी धारा-46 के व्यापक दायरे पर थी चिंता

विदेशमंत्रालय ने कहा कि घरेलू और विदेशी सप्लायरों ने समझौते की धारा-46 के व्यापक दायरे पर चिंता जताई थी। उन्हें आशंका थी कि अन्य कानूनों के तहत भी क्षतिपूर्ति के दावे किए जा सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि एटमी दुर्घटना होने पर मुआवजे के लिए अन्य कानूनों के तहत किए जाने वाले दावे इस धारा से नहीं जुड़ते। यह धारा खास तौर पर संचालक पर ही लागू होती है।