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66 से घटकर 10 हो सकती हैं केंद्र की मौजूदा योजनाएं

6 वर्ष पहले
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प्रोजेक्टों की निगरानी मैं खुद करूंगा : मोदी

केंद्रकी 66 योजनाओं की संख्या घटाकर 10 की जा सकती है। मौजूदा योजनाओं में से कुछ खत्म हो सकती हैं। कुछ राज्यों के हिस्से जा सकती हैं। मुख्यमंत्रियों के तीन उप-समूह इस संबंध में फैसला करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में रविवार को हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की पहली बैठक में लिया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र की योजनाओं में कटौती से तमिलनाडु और यूपी जैसे कुछ राज्य नाराज भी हो सकते हैं। इन राज्यों ने बैठक के दौरान सरकारी योजनाआें के लिए ज्यादा फंड की मांग की है। शेषपेज|4







तमिलनाडुके मुख्यमंत्री पन्नीरसेलवम ने कहा, ‘केंद्र की बड़ी योजनाओं में राज्यों की हिस्सेदारी 25 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।’ बैठक में 31 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया। लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नहीं पहुंचीं।

इस दौरान मोदी ने कहा, ‘हमें सबको एक तराजू में तौलना छोड़ राज्यों की जरूरत के हिसाब से योजनाएं बनाने की जरूरत है।’ उन्होंने केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों के तीन उप-समूह बनाने की घोषणा की। यह उप-समूह तय करेगा कि कौनसी योजना किस राज्य के हिस्से जाएगीं और कौनसी कटेगी। इन योजनाओं के लिए 2014-15 में 3,38,562 करोड़ रुपए का बजट था। वित्त वर्ष 2013-14 से दोगुना। पिछले साल इन योजनाओं की संख्या 147 से घटाकर 66 की गई थी।

प्रधानमंत्री ने ली नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल की पहली बैठक

बैठक की 5 बड़ी बातेंे

1. पीएमने राज्यों से जन-धन योजना को सफल बनाने की अपील की। 2.तीनउप-समूहों के लिए मुख्यमंत्रियों की ओर से ही नाम मांगे गए, फैसला बाद में। 3.राज्यदो टास्क फोर्स बनाएं, जो गरीबी हटाने का काम करेंगी। 4.ज्यादातरराज्य केंद्र की योजनाएं कम करने और बड़ी योजनाएं चालू रखने के पक्ष में। 5.रिसर्चविंग थिंक-टैंक का काम करेगी, कंसल्टेंसी विंग राज्य केंद्र की फंडिंग सुझाएगी।

पहली ही बैठक में लाए घोषणापत्र के मुद्दे

{मोदीबोले, सबसे बड़ी चुनौती गरीबी हटाना।,

{मकसद बताया, ‘सबका साथ, सबका विकास’।

{आयोग की स्पेशल विंग होगी ‘टीम इंडिया’। इसमें सभी राज्यों और मंत्रालयों के प्रतिनिधि होंगे। ये नीति आयोग और राज्य के बीच कम्युनिकेशन चैनल का काम करेंगे।

मोदी ने मुख्यमंत्रियों से मतभेद भुलाकर तरक्की, रोजगार और निवेश बढ़ाने के लिए काम करने की अपील की। उन्हें भरोसा दिलाया कि प्रोजेक्टों की निगरानी वह खुद करेंगे। सुझाव दिया कि हर राज्य में अटके मुद्दों के समाधान के लिए एक अफसर नियुक्त होना चाहिए।