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कमजोर कांग्रेसी प्रत्याशियों ने हराया

6 वर्ष पहले
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अकाली दल के चारों उम्मीदवारों की हार के पीछे वोट समीकरण की पड़ताल से हुआ खुलासा

शेखरघोष नई दिल्ली

कमजोरकांग्रेस प्रत्याशियों के चलते विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन वाले शिअद उम्मीदवार मनजिंदर सिंह सिरसा, अवतार सिंह हित, हरमीत सिंह कालका और जितेंद्र सिंह शंटी चारों उम्मीदवार चारों खाने चित हो गए। 2013 के मुकाबले इस विस चुनाव में चारों प्रत्याशियों को अधिक वोट प्रतिशत मिले।

पिछली गलतियों से सबक लेते हुए इस चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए इस बार भाजपा अकाली शीर्ष नेतृत्व ने मनजिंदर सिंह सिरसा को शिअद के चुनाव चिन्ह तराजू से चुनाव लड़वाने के साथ तीनों उम्मीदवारों को भाजपा के चुनाव चिह्न कमल के फूल पर चुनाव मैदान में उतारा था पर चारों ही विधान सभा क्षेत्रों में कांग्रेस के उम्मीदवार के बेहद कमजोर साबित होने पर वोट आप के उम्मीदवार को पड़ा जिसकी वजह से इन्हें हार का सामना करना पड़ा।

राजौरी गार्डन से शिअद के चुनाव चिह्न तराजू से चुनाव लड़े एमएस सिरसा को इस बार 44,880 मत मिले जबकि पिछले विधान सभा चुनाव में 41,721 मत मिले थे। इसके बाद भी आप के उम्मीदवार जनरैल सिंह से लगभग 10,036 वोट से चुनाव हार गए। हरिनगर घंटा घर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व अकाली उम्मीदवार श्याम सिंह वर्मा जो पिछले बार तराजू के निशान से चुनाव लड़े थे उन्हें वर्ष 13 के चुनाव में 30,036 मत मिले थे। इस विधान सभा चुनाव में उन्हें 39,381 मत मिले इसके बाद भी वह आप के उम्मीदवार जगदीप सिंह से 24,496 मतों से हार गए।

कालका जी के उम्मीदवार हरमीत सिंह कालका को पिछली विधान सभा चुनाव में 30,683 मत मिले थे जबकि इस विधानसभा चुनाव में 35,335 मत मिले इसके बाद भी वह आप के उम्मीदवार अवतार सिंह से 19,769 वोटों से चुनाव हार गए। चौथी विधान सभा क्षेत्र शाहदरा में पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह शंटी को वर्ष 2013 में 45,364 मत मिले थे जबकि इस वर्ष उन्हें 46,792 मत मिले पर आप के रामनिवास गोयल से 11,731 मतों से हार गए।

शिरोमणि अकाली दल बादल के दिल्ली विधानसभा चुनाव में चारों उम्मीदवारों के हार का कारण दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के राजनीति में गहरे संबंध रखने वाली कांग्रेस समर्थित अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष सरना बंधुओं का भी हाथ माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस विधान सभा चुनाव में अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं से कांग्रेस के उम्मीदवारों को वोट देने का व्हिप जारी किया था। इसके साथ ही चारों शिअद उम्मीदवारों के खिलाफ खुलकर चारों विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेसी उम्मीदवारों के समर्थन में चुनाव प्रचार भी किए थे जिस कारण सिख मतदाता का कुछ वोट प्रतिशत बंट गए।