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बिना जरूरत मरीजों को ऑपरेशन का सुझाव

7 वर्ष पहले
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पैसेकी लालच में कुछ स्वार्थी डॉक्टर मरीजों का सीना चीर रहे हैं। हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को बेवजह सर्जरी कराने की सलाह दी जा रही है, ताकि कुछ डॉक्टरों की जेब गरम हो। हार्ट केयर फाउंडेशन फंड नामक संस्था द्वारा किए गए सर्वे में खुलासा हुआ है कि 33 फीसदी हृदय रोगियों को सर्जरी की जरूरत ही नहीं थी, लेकिन डॉक्टरों ने इन्हें बेवजह सर्जरी की सलाह दी।

हार्ट केयर फाउंडेशन फंड नामक संस्था गरीब अथवा आर्थिक तौर पर कमजोर हृदय रोगियों के इलाज में सहयोग करती है। संस्था द्वारा इस बाबत एक अभियान चलाया जा रहा है।

संस्था के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल के मुताबिक अभियान के तहत संस्था के पास 180 मरीजों ने हृदय की सर्जरी के लिए आवेदन किया। संस्था के चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा मरीजों की दोबारा स्क्रीनिंग करने पर ज्ञात हुआ कि इनमें से 33 फीसदी मरीजों को सर्जरी की जरूरत ही नहीं थी। इनके अलावा 33 फीसदी मरीज ऐसे हैं जिन्हें सर्जरी की जरूरत है और शेष 34 फीसदी मरीज ऐसे हैं जिन्हें दवा के जरिए भी ठीक किया जा सकता है।

इनमें सर्वाधिक उत्तरी भारत के मरीज शामिल हैं। हालांकि डॉ. केके अग्रवाल इस मामले में डॉक्टरों की गलती नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि हमने दोबारा जांच किया तो हमें लगा कि बगैर सर्जरी के भी इन मरीजों का इलाज हो सकता है।

एमटीएनएल परफेक्ट हेल्थ मेला 15 से

हार्टकेयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा 21वां एमटीएनएल परफेक्ट हेल्थ मेला 15 से 19 अक्टूबर तक नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। मेले में पहली बार दिल का महाकुंभ नामक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। जहां पर तमाम बड़े अस्पताल एक ही छत के नीचे इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे।

एम्स ने पहले ही की थी शिकायत

बतादें कि दो सप्ताह पहले ही एम्स के निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा ने भी खुलासा किया था कि एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचने से पहले ही रोजाना गंभीर तौर पर बीमार अथवा घायल एक व्यक्ति दम तोड़ देता है। डॉ. मिश्रा ने इसकी मुख्य वजह मरीज की स्थिति अत्यधिक खराब होने के बाद निजी अस्पताल बगैर आवश्यक इंतजाम के ही मरीज को एम्स ट्रॉमा सेंटर रेफर कर देते हैं। अस्पतालों की इस लापरवाही से नाराज होकर एम्स प्रशासन ने अब इन अस्पतालों को सख्त लहजे में फटकार लगानी शुरू कर दी है और संबंधित राज्यों के स्वास्थ्य निदेशालय को रिपोर्ट भेजना