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सारदा घोटाले जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए
एजेंसी, कोलकाता| सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर तीन माह पहले करोड़ों रुपए के सारदा घोटाले की जांच शुरू करने वाली सीबीआई की विशेष अपराध शाखा ने कहा है कि विभिन्न एजेंसियों द्वारा पूर्व में की गई जांच ने इस मामले को पेचीदा बना दिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के एक सूत्र ने बताया, ‘हमने तीन माह पहले जांच प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित एसआईटी विशेष जांच दल और राज्य सरकार के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा की गई जांच ने तफ्तीश की पूरी प्रक्रिया को जटिल बना दिया।’ उन्होंने कहा कि सीबीआई आपराधिक साजिश, धन का दुरुपयाेग और सारदा प्रकरण में विश्वास के आपराधिक हनन जैसे पहलुओं की जांच कर रही सीबीआई के लिए चीजों को एक-दूसरे से जोड़ना बेहद कठिन होता जा रहा है। सूत्र से यह सवाल किया गया कि सीबीआई अपनी जांच प्रक्रिया कब पूरा कर पाएगी क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)ने कहा था कि उसे उम्मीद है कि नवंबर तक अभियोजन शिकायत दाखिल कर दी जायेगी। इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘प्रवर्तन निदेशालय ने अप्रैल 2013 से प्रक्रिया शुरू कर दी है। हमने केवल तीन माह पहले ही शुरूआत की है। इसमें खासा समय लगेगा। लेकिन चलिए देखते हैं। नवंबर की संभवत: समयसीमा है तथा हम अपना सर्वोत्तम प्रयास कर रहे हैं।’
अबतक 10 गिरफ्तारियां: केंद्रीयजांच ब्यूरो ने मामले में अब तक 10 गिरफ्तारियां की हैं तथा तारा चैनल के पूर्व अध्यक्ष रथीकांत बसु, तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य सृंजय बोस, आईआरसीटीसी के अधिकारियों एवं अन्य से पूछताछ की है। जांच एजेंसी ने राज्य पुलिस एवं अधिकारियों से कथित रूप से पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पाने की भी बात कही। सूत्र ने कहा कि सीबीआई के पास पर्याप्त मानवश्रम का अभाव है। उन्होंने कहा, ‘‘जांच के दायरे को देखते हुए सीबीआई में पर्याप्त मानव श्रम का भारी अभाव है और इसके अलावा कोई विशिष्ट विधि अधिकारी इसके लिए नहीं दिया गया है।’