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केंद्र सरकार के पास ‘शहीद’ की कोई परिभाषा नहीं

7 वर्ष पहले
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शहीदकौन? सीमा पर दुश्मन से लोहा लेते हुए मारे गए जवान? या फिर देश के भीतर आतंकी कार्रवाई, दंगों, नक्सलवाद, उग्रवाद जैसी चुनौतियों का मुकाबला करते हुए जान गंवा देने वाले सैनिक? सिर्फ सेना के ही जवान शहीद कहलाएंगे? या फिर पुलिस अर्धसैनिक बलों के जवानों और अफसरों को भी यह सम्मान मिलेगा? इनमें से किसी सवाल का जवाब केंद्र सरकार को पास नहीं है। क्योंकि उसके पास ‘शहीद’ शब्द की कोई परिभाषा ही नहीं है। शेषपेज|4



गृहमंत्रालय के मुताबिक, ‘भारत सरकार ने कहीं भी ‘शहीद\\\' शब्द को परिभाषित नहीं किया है। लेकिन सरकार विभिन्न सशस्त्र बलों के जवानों द्वारा किए गए बलिदान में कोई भेदभाव नहीं करती। दुश्मन से मुकाबला करते हुए अपूर्व वीरता का प्रदर्शन करने के लिए ‘अशोक चक्र’ दिया जाता है। यह सम्मान सेना, नौसेना, वायु सेना, किसी रिजर्व बल या प्रादेशिक सेना के सभी पुरुष या महिला अफसरों को मिल सकता है। इसी तरह ‘कीर्ति चक्र’ और ‘शौर्य चक्र’ भी मिलते हैं। इनकी सिफारिश रक्षा मंत्रालय करता है। सेवाकाल में और रिटायरमेंट के बाद भी सभी को नियमानुसार एक जैसे लाभ मिलते हैं।’

ये थे सवाल

दिल्लीके आरटीआई कार्यकर्ता गोपाल प्रसाद ने गृह मंत्रालय से जानकारी मांगी थी। पूछा था कि एक जैसे ही काम में लगे सेना एवं अर्द्धसैनिक बलों के जवानों की मृत्यु की स्थिति में क्या सेना का जवान ‘शहीद\\\'\\\' कहलाने का हकदार है? जबकि अर्द्धसैनिक बलों के ऐसे जवान सिर्फ मृतक घोषित होते हैं?