कांग्रेस-एनसीपी में आज फिर बैठक
महाराष्ट्र में सीटों पर गतिरोध कायम
एनडीए: भाजपा v/s शिवसेना यूपीए: कांग्रेस v/s एनसीपी
2 गुट, 4 दल; किसे, क्या हासिल होगा
झगड़ा? क्योंकिचारों को चाहिए अपना सीएम
शिवसेना: कुल288 में से अपने लिए 151, जबकि भाजपा के लिए 119 सीटें चाहती है। बाकी अन्य सहयोगियों को। यही फॉर्मूला 25 साल से चल रहा है। इस विवाद को तूल देने के पीछे शिवसेना की मंशा है कि सीएम पद पर एनडीए उद्धव ठाकरे को प्रोजेक्ट करे।
भाजपा: हरहाल में महाराष्ट्र में अपना सीएम चाहती है। उद्धव को सीएम प्रोजेक्ट करने की बजाय उसने फॉर्मूला दिया है कि जिसे ज्यादा सीटें, सीएम उसी का। इसीलिए वह 130 सीटें मांग रही है। भाजपा अब महाराष्ट्र में केंद्र की तरह छोटे भाई के बजाय बड़े भाई की भूमिका देख रही है।
कांग्रेस: उसेलगता है कि कमजोर होती मोदी लहर और एनडीए के झगड़े से उसकी उम्मीदें बढ़ी हैं। लिहाजा 15 साल पुराने सहयोगी एनसीपी को कम सीटें देकर ज्यादा अवसर बनाने में जुटी है।
एनसीपी: 50%यानी 144 सीटें चाहती है। पार्टी प्रमुख शरद पवार का गणित है ज्यादा सीटें जीतकर बेटी सुप्रिया सुले को सीएम बनवाया जाए।
मुश्किलेंक्या? अकेलेलड़ने से चारों ही बचना चाहेंगे
शिवसेना: वोटबैंक सिर्फ मराठी हैं। अकेले लड़ी तो ये वोट बैंक भाजपा-एनसीपी-मनसे और शिवसेना के बीच बंट जाएगा। उसका कैडर भी बिखरकर मनसे में जा चुका है। बाल ठाकरे की तरह कोई करिश्माई नेता भी नहीं है। पूरा ड्रामा केवल प्रेशर पॉलिटिक्स है।
भाजपा: बेशकपार्टी का वजूद महाराष्ट्र में बढ़ा है। लेकिन अब भी शिवसेना के बिना वह कमजोर है। अकेले लड़ी तो भले ही वह शिवसेना से ज्यादा सीटें जीत ले, लेकिन सरकार बनाने लायक बहुमत उसे नहीं मिल सकता। ऐसे में उसकी कोशिश गठबंधन बचाए रखने की होगी।
कांग्रेस: अगरएनसीपी से गठबंधन टूटता है तो कांग्रेस अकेली हो जाएगी। क्योंकि तो वह शिवसेना के साथ जा सकती है और भाजपा के साथ। 15 साल की एंटी इन्कमबेंसी के चलते अकेले दम पर बहुमत मिलना मुश्किल है। वह नहीं चाहेगी कि एनसीपी का साथ छूटे।
एनसीपी: अकेलेदम पर बहुमत तो नहीं ला सकती। लेकिन पवार जानते हैं-कांग्रेस कभी नहीं चाहेगी कि गठबंधन टूटे, लिहाजा अपनी शर्तें मनवाने के लिए दबाव बनाए रखेंगे। शेषपेज | 4
3.तलाकहुआ तो? भाजपा-एनसीपी फायदे में
भाजपा : पार्टी को लगता है अकेले लड़ी तो कम से कम 100