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चार को छोड़कर बाकी सभी 214 कोल ब्लॉक आवंटन रद्द

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज नेटवर्क|नई दिल्ली

सुप्रीमकोर्ट ने कोयला घोटाला मामले में बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने 1993 से 2010 के बीच बांटे गए 218 कोल ब्लॉक में से 214 के आवंटन रद्द कर दिए। लेकिन चार ब्लॉक को बख्श दिया। इनमें से एक-एक एनटीपीसी सेल को आवंटित है। जबकि दो ब्लॉक मध्यप्रदेश के अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट को मिले हुए हैं।

चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। बेंच ने कहा कि जो कंपनियां फिलहाल खदानों से कोयला निकाल रही हैं वे छह माह, यानी 31 मार्च 2015 तक इसे जारी रख सकती हैं। पर उन्हें 295 रु. प्रति टन जुर्माना देना होगा। पहले निकाले जा चुके कोयले पर भी इसी दर से पैसे चुकाने होंगे। इससे सरकार को 7900 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है। जो कंपनियां खुदाई शुरू नहीं कर पाई हैं उन्हें नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को मुआवजा देना होगा। कोर्ट ने 25 अगस्त को कोल ब्लॉकों के आवंटन को अवैध करार दिया था।

कंपनी और सरकार दोनों पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त बोल

{अवैधप्रक्रिया से काेयला खदान हािसल करने वालों से सहानुभूित नहीं रखी जा सकती। उन्हें इनका नतीजा भुगतना होगा। {यह फैसला वर्षों से चली रही केंद्र की गलत नीित को सुधारने के लिए दिया गया है। सरकार इसे अपने लिए संदेश माने।

(चीफ जस्टिसआरएम लोढ़ा शुक्रवार को रिटायर हो रहे हैं। संभवत: यह उनका आिखरी फैसला है।)

सरकार के पास अब सिर्फ दो विकल्प

फैसलेके मुताबिक निजी कंपनियां 42 ब्लॉक पर अगले छह महीने तक खुदाई कर सकती हैं। इस दौरान केंद्र सरकार को इनके दोबारा आवंटन पर फैसला लेना होगा। सरकार के पास दो विकल्प हैं। पहला-ब्लॉक सरकारी कंपनी कोल इंडिया को सौंप दे। दूसरा- इन सभी की भी नीलामी कर दे। बाकीबचे 172 ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया कभी शुरू की जा सकती है।

सीबीआईजांच जारी रहेगी : कोर्टने साफ किया है कि इस फैसले का सीबीआई जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सीबीआई इस मामले में 27 एफआईआर दर्ज कर चुकी है। उसकी जांच जारी रहेगी।

राज्य भी होंगे प्रभावित| कईराज्यों की बिजली, मेटल्स और खनन कंपनियों को कोल ब्लॉक आवंटित हुए थे। उनके सामने भी संकट की स्थिति पैदा होगी।

शेयरमें हजारों करोड़ डूबे| 25अगस्त के बाद से 23 स्टील बिजली कंपनियों के शेयरों में निवेशकों के 50,000 करोड़ रुपए से ज्यादा डूब चुके हैं।

अब कोल ब्लॉक की नीलामी