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एनसीईआरटी की पुस्तकों में जुड़ेगा मंगल अभियान

7 वर्ष पहले
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{सीबीएसई ने कहा, मंगल अभियान पर ओपन बुक टेस्ट में पूछे जाएंगे प्रश्न

एसकेगुप्ता | नई दिल्ली

मंगलयानकी सफलता के साथ ही एशियाई देशों में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस अभियान के लिए इसरो की ओर से क्या तैयारियां की गईं, मंगलग्रह पृथ्वी से कितना दूर है और इस तक पहुंचने में मंगलयान को कितना समय लगा, यह सभी जानकारियां अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अपनी किताबों में जोड़ेगा। साइंस और भूगोल की पुस्तकों में मंगलयान की और उसकी खगोलीय संकल्पना के बारे में छात्रों को बताया जाएगा।

उधर सीबीएसई की आगामी ओपन बुक टेस्ट सीरीज में छात्रों से मिशन मंगल से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। इस बारे में मिशन-मंगल से जुड़े आर्टिकल सभी स्कूलों को भेजे जाएंगे। एनसीईआरटी के वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि अंतरिक्ष विज्ञान में भारत ने मंगल मिशन के साथ ही लंबी छलांग लगाई है। मंगल मिशन क्या है? भारत अन्य देशों से कैसे आगे निकल गया? क्या संभावनाएं तलाशने मंगल पर मंगलयान को भेजा गया है? मिथेन की खोज से क्या लाभ होगा? इन सभी सवालों के जवाब विशेषज्ञों की ओर से मंगलयान की संकल्पना तैयार कर पाठ्य सामग्री के रूप में स्कूलों को भेजी जाएगी। इससे छात्रों को अंतरिक्ष की नई खोज और अभियानों के बारे में जानकारी हासिल होगी। उधर सीबीएसई के चेयरमैन विनीत जोशी बताते हैं कि हमने सोमवार को ही स्कूलों को यह निर्देश जारी किए थे कि वह छात्रों को मंगलयान के मंगलग्रह की कक्षा में स्थापित होने के अद्भुत क्षणों को लाइव दिखाएं। जो स्कूल ऐसा नहीं कर सके हैं, वह इन क्षणों की रिकॉर्डिंग छात्रों को दिखाएं और छात्रों को मंगल मिशन के बारे में जानकारी दें। इसके अलावा मंगलयान में कितने तरह के उपकरण लगे हैं और उसकी कार्यप्रणाली किस प्रकार से है, इसकी जानकारी भी छात्रों को दी जाए। यह काम भूगोल और साइंस के शिक्षकों द्वारा स्कूलों में किया जाएगा। बोर्ड की ओर से अब यह भी तय किया गया है कि मंगल मिशन से संबंधित प्रश्न ओपन बुक टेस्ट सीरिज में छात्रों से पूछे जाएं। ऐसा करने से छात्र भारत की इस उपलब्धि को गंभीरता से समझेंगे और मंगल मिशन की जानकारी जुटाएंगे। हालांकि बोर्ड की ओर से भी स्कूलों को मंगल-मिशन पर आर्टिकल भेजा जाएगा। इसके आधार पर छात्रों को जानकारी देकर ओपन बुक टेस्ट परीक्षा की तैयारी स्कूल करा सकें