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दिल्ली: हर दसवें बच्चे को मोटापा

7 वर्ष पहले
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दिल्ली: हर दसवें बच्चे को मोटापा

नई दिल्ली | दिल्लीऔर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हर दसवां बच्चा मोटापे का शिकार है जिसके कारण उनके कम उम्र में ही हृदय रोगों का शिकार होने की आशंका ज्यादा है। उद्योग संगठन एसोचैम ने दिल्ली-एनसीआर के 25 सरकारी एवं निजी विद्यालयों में 3000 बच्चों पर कराए गए एक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि जीवन शैली और खानपान की आदतों में बदलाव के कारण बड़ी संख्या में बच्चों में दिल की बीमारी होने का खतरा पैदा हो गया है। सामान्य वजन वालों में हृदय रोग का खतरा सिर्फ आठ प्रतिशत होता है जबकि मोटापे के शिकार लोगों में यह खतरा 38 प्रतिशत होता है। इसके अलावा पहले जहां औसतन 50 साल की उम्र में लोगों को दिल की बीमारियों का खतरा होता था वहीं अब यह उम्र घटकर 20 साल हो गई है। इन दोनों तथ्यों को मिला देने से यह स्पष्ट है कि दिल्ली एनसीआर के छात्रों में हृदय रोग का खतरा ज्यादा है। एसोचैम की स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष डा. बीके राव का कहना है कि उच्च रक्तचाप और खून में वसा की ज्यादा मात्रा खतरनाक है। अस्वास्थ्यकर जीवन शैली छोटी उम्र के बच्चों के लिए भी नुकसानदायक है ओर आगे जाकर हृदय रोग का खतरा पैदा कर सकती है। यही कारण है कि एक दशक पहले जहां 40 साल से कम उम्र के लोगों में हृदय रोग का खतरा सिर्फ 10 प्रतिशत होता था वहीं अब उनमें यह खतरा 35 से 40 प्रतिशत के बीच होता है। डा. राव ने कहा, स्वास्थ्यवर्धक खाने को उबाऊ की श्रेणी से निकालना जरूरी है। पैक किए हुए खाने की आदत छोड़ने से स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ होगा।





सर्वेक्षण में शामिल 78 प्रतिशत माता-पिता ने कहा कि वे अपने बच्चे को विद्यालय के लिए घर का खाना देना पसंद करते हैं। हालांकि 35 प्रतिशत ने माना कि वे कैंटीन में खाने के लिए उन्हें 40 से 100 रुपये भी देते हैं। बच्चों में 51 प्रतिशत ने कहा कि वे हर दिन 30 से 50 रुपये कैंटीन में खर्च कर देते हैं। इसमें 45 प्रतिशत पास्ता खरीदने में जाता है जबकि 40 प्रतिशत नूडल्स खरीदने में।