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दीवान-ए-खास में संरक्षण कार्य आज से

7 वर्ष पहले
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भारतीयपुरातत्व सर्वेक्षण लालकिले के भीतर बने 17वीं सदी के स्मारक दीवान-ए-खास के संरक्षण का काम आज से शुरू कर देगा। इस मुगलकालीन हॉल की छत का एक हिस्सा ‘बैठ’ जाने के बाद यह संरक्षण-कार्य किया जा रहा है।

हालांकि एएसआई दिल्ली सर्किल ने शंकाओं को दरकिनार करते हुए कहा है कि ‘खतरे’ की काेई बात नहीं है और यह संरक्षण का ‘नियमित’ कार्य है। एएसआई दिल्ली सर्किल के अधीक्षक पुरातत्वविद वसंत स्वर्णकार ने बताया,‘दीवान-ए-खास तीन शताब्दियों से ज्यादा समय से खड़ा है और इसकी छत को कई परतों में बनाया गया था। सबसे नीचे वाली परत लकड़ी की थी। समय के साथ लकड़ी पुरानी हो गई और इसके ढहने या सड़ने की वजह से छत का एक हिस्सा बैठ गया। उन्होंने कहा,‘हम सोमवार से संरक्षण का काम शुरू कर रहे हैं। मैं इसके लिए आदेश जारी कर चुकस हूं।’ हॉल की ‘खतरनाक हालत’ से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट को खारिज करते हुए स्वर्णकार ने कहा,‘ऐसा कुछ भी चिंता के लायक नहीं है, जैसा कि खबरों में दावा किया गया है।’





दीवान-ए-खास निजी दर्शकों का हॉल इस वैश्विक विरासत स्थल के मुख्य आकर्षणों में से एक है।

इस ऐतिहासिक स्थल पर प्रतिदिन औसतन 12 से 15 हजार लोग आते हैं। एएसआई दिल्ली के अनुसार,‘आगंतुकों द्बारा कलाकृतियों को नुकसान पहुंचाए जाने पर’ इसी साल इस हॉल को जनता के लिए बंद कर दिया गया था। ‘छत का हिस्सा बैठने की खबर दो साल पहले आई थी लेकिन संरक्षण की पूरी प्रक्रिया में समय लगता है क्योंकि असल संरक्षण कार्य के लिए बहुत सी तैयारी करनी पड़ती है।’