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बच्चों की सुरक्षा: स्कूलों में बढ़े निगरानी तो बने बात
हालमें स्कूलों में बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार की बढ़ती घटनाअों ने अभिभावकों को चिंता में डाल दिया है। शिक्षा निदेशालय से लेकर कोर्ट तक में यह मामला विचाराधीन है कि बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो? स्कूलों से जुड़ी संस्थाओं और अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में निगरानी और स्कूल प्रबंधन के साथ अभिभावकों की भागीदारी से ही सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता होगी। इसके लिए स्कूलों में सीसीटीवी (क्लोज सर्किट कैमरा टेलीविजन) लगाने मात्र से ही छात्रों की सुरक्षा मजबूत नहीं हो जाएगी। इसके लिए अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। स्कूलों को भी अपने यहां कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन कराना चाहिए। इससे उन्हें यह पता चल सकेगा कि जो व्यक्ति स्कूल में काम कर रहा है उसका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड तो नहीं है। ऐसे तमाम सुझाव स्कूलों की एसोसिएशन और अभिभावकों से बातचीत के बाद सामने आए।
इस दौरान कुछ और भी महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए, मसलन छोटे बच्चे अपराधियों के निशाने पर ज्यादा होते हैं, क्योंकि उनके विरोध करने की क्षमता कम होती है। ऐसे में बच्चे को स्कूल में बैठाते समय अभिभावक यह जरूरत बताएं कि जब कोई तुम्हें छुए और उसका एहसास बुरा हो तो तुरंत टीचर को बताओ। अगर टीचर का छूना बुरा लगता है तो घर आकर मां-बाप को बताओ। शरीर के कौन से अंग को छूना बुरा है, यह भी बच्चों को बताया जाना चाहिए।
मैनेजमेंटआई वॉच जरूरी
^स्कूलोंमें सीसीटीवी कैमरे लगाकर मैनेजमेंट आई वॉच करे। जहां गर्ल्स स्टूडेंट की आवाजाही है, जैसे शौचालय आदि जगहों पर महिला सफाईकर्मी नियुक्त हों। पुरुष कर्मियों को वहां तैनात किया जाए, जहां गर्ल्स स्टूडेंट से संपर्क कम हो। मैनेजमेंट कर्मचारी और छात्रों के व्यवहार पर सीसीटीवी से निगरानी करें। कर्मचारियों की पुलिस वेरिफिकेशन कराएं। -आरसीजैन, अध्यक्ष, दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल्स मैनेजमेंट एसोसिएशन।
स्कूलोंमें टास्क फोर्स बने, अभिभावक समझें जिम्मेदारी
^स्कूलोंमें टास्कफोर्स बनें, स्टूडेंट काउंसिल का गठन किय जाए। इसमें हर क्लास से एक छात्र और शिक्षक को लेकर काउंसिल गठित हो, छात्र उस काउंसिल के माध्यम से अपनी समस्याएं रखें। प्रिंसिपल के साथ टीम स्टूडेंट की मीटिंग हो। स्कूलों में महिला और पुरुष सुरक्षा कर्मी तैनात किए जाएं। महिला सुरक्षा कर्मी शौचालयों पर विजिट करें। कक्षाओं में भ