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दिल्ली में ऑटो भी नहीं हैं सुरक्षित

7 वर्ष पहले
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ऑटो का जीपीएस डिसेबल करना है बहुत आसान

{जीपीएस का कंट्रोल ड्राइवर या सवारी के पास नहीं बल्कि कंट्रोल रूम के पास होना चाहिए

{करोड़ों के खर्च से लगी जीपीएस हटते ही गुम हो जाती है ऑटो की लोकेशन

शेखरघोष | नई दिल्ली

राजधानीमें कैब ही नहीं बल्कि ऑटो भी सुरक्षित नहीं हैं। दिल्ली इंटीग्रेटिड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम (डिम्ट्स) की देखरेख में लगभग 35 हजार ऑटो में करोड़ों की लागत से लगाई गई जीपीएस को डिसेबल करना बेहद आसान है। इसकी वजह यह है कि ऑटो में जीपीएस का नियंत्रण ड्राइवर के हाथों में है। हालांकि इसका कंट्रोल डिम्ट्स के कंट्रोल रूम के पास होना चाहिए ताकि सुरक्षा बनी रही। वर्तमान में जीपीएस के हटते ही ऑटो का लोकेशन गुम हो जाता है। इस प्रकार से ऑटो को कभी भी कहीं भी लेकर जाया जा सकता है।

ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रहे एक लाख ऑटो में जीपीएस लगाने के आदेश दिए थे। जिनमें से 50 हजार ऑटो के परमिट में से सड़कों पर उतारे गए 35 हजार ऑटो में डिम्ट्स ने जीपीएस यंत्र की सुरक्षा का बिना ख्याल किए बाजार से कई गुणा अधिक कीमत पर यानी 26 हजार ऑटो में प्रति ऑटो 26800 के दर से मीटर,जीपीएस लगाने का टेंडर गोल्डटेक कंपनी को जारी कर दिया। इसमें डिम्टस ने 26000 ऑटो से डिम्टस ने दो वर्ष के लिए जीपीएस की सिम प्रदान करने के 5400 के दर से 14 करोड़ रुपए वसूले। मीटर, पैनिक बटन लगाने के लिए गोल्डटेक कंपनी ने 18800 की दर से 26000 ऑटो से 34.84 करोड़ रुपए वसूल किए थे।

\\\"पैसे तो ले लिए लेकिन आज तक ऑटो मेंं नहीं लगाए गए पैनिक बटन\\\'

सोनीके अनुसार कंपनियों ने ऑटो वालो से पैनिक बटन के लिए पैसे तो वसूल कर लिए मगर सड़क पर दौड़ रही एक भी ऑटो में आज तक पैनिक बटन नहीं लगाया गया। ना ही मीटर से भाड़े का बिल निकल रहा। ऑटो में सवारी करने वाले सवारियों के लिए पैनिक बटन का प्रावधान था। इसमें खतरा होने पर पैनिक बटन दबाने पर कंट्रोल रूम में इसकी सूचना मिल जाती और उन्हें पुलिस सहायता उपलब्ध करवाई जा सकती थी। इस बारे में डिम्ट्स और परिवहन विभाग के अधिकारियों से लगातार संपर्क के बाद भी उन्होंने जवाब नहीं दिए।

मीटर से छेड़खानी करना नहीं है मुश्किल : सोनी

दिल्लीऑटो रिक्शा संघ से संबंधित भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री राजेन्द्र सोनी का कहना है कि ऑटो में लगे जीपीएस सिस्टम का केवल द