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धन के अभाव में ठप पड़ सकती हैं बिहार की कई रेल परियोजनाएं
कमसे कम रेलवे के मामले में फिलहाल बिहार के अच्छे दिन नहीं रहे हैं। फंड की कमी बताकर रेल मंत्रालय ने बिहार की स्वीकृत परियोजनाओं में अपने हाथ सख्त कर लिए हैं। हां, एक अच्छी खबर यह जरूर है कि दीघा में गंगा पर बन रहा रेल पुल अगले साल के जून महीने तक चालू हो जाएगा जबकि मुंगेर में गंगा पर बन रहा रेल पुल धन की कमी झेल रहा है। इस पुल के पूरा होने के लिए सिर्फ साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए की जरूरत रह गई है। रेलवे इस राशि के जुगाड़ में है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार इस समय बिहार में रेलवे की पांच दर्जन से अधिक परियोजनाओं पर काम चल रहा है। लेकिन, हरेक परियोजना के लिए धन उपलब्ध नहीं है। रेलवे ने बिहार सरकार से भी आग्रह किया है कि कुछ परियोजनाओं ने वह धन निवेश करे। राज्य सरकार की ओर से इस मामले में कोई सुगबुगाहट नहीं है। धन की कमी का आलम यह है कि चालू वित्तीय वर्ष में बिहार की परियोजनाओं के लिए सिर्फ 1231 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है जबकि सभी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 29857 हजार करोड़ की जरूरत का आकलन किया गया था। इनमें इस साल के मार्च तक 11821 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। परियोजनाओं पर व्यय का आकलन तत्कालीन बाजार भाव के लिहाज से किया गया था। कुछ परियोजनाएं पांच से दस साल पुरानी हैं। अभी के बाजार भाव के हिसाब से लागत खर्च बेशुमार बढ़ जाएगा। ऐसे में अगर कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया तो परियोजनाएं बंद भी हो सकती हैं। सूत्रों ने बताया कि निजी निवेशक अगर आगे बढ़ते हैं, तभी कोई रास्ता निकल सकता है। वैसे, अगले साल बिहार विधानसभा का चुनाव है। संभव है चुनाव को ध्यान में रखकर रेल मंत्रालय के लिए अपने खजाने का मुंह उदारता से खोले।
लंबित रेल परियोजनाओं का ब्योरा
नईरेल लाइन 34
लाइन का दोहरीकरण 06
आमान परिवर्तन 06
विद्युत्तीकरण 06
वर्कशाप एवं कारखाना 10