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मेडिकल उपकरणों में सौ फीसदी एफडीआई को मिल सकती है मंजूरी
बहुतजल्द आपको अपने मेडिकल जांच के लिए जेब से कम पैसे खर्च करने होंगे। मेडिकल क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए सरकार ने अब मेडिकल से जुड़े उपकरणों में सौ-फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) करने का फैसला किया है।। देश में बनने वाले मेडिकल उपकरणों के लिए अब ऑटोमेटिक रूट से विदेशी निवेश किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के आसार हैं। बताते चलें कि मौजूदा व्यवस्था में फार्मा सेक्टर के अंतर्गत मेडिकल उपकरणों के लिए अनुमति लेने के बाद ही एफडीआई की व्यवस्था है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्र का कहना है, ‘मेडिकल उपकरणों में ऑटोमेटिक रूट से सौ फीसदी एफडीआई का फायदा सीधे तौर पर स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलने वाला है। देश में मेडिकल उपकरणों का निर्माण होने पर अस्पतालों और डायग्नोसिस सेंटरों की लागत कम आएगी। इसका सीधा फायदा आम लोगों को ही मिलेगा।’ सूत्र के अनुसार हाल ही में कैबिनेट सचिवालय की ओर से मेडिकल उपकरणों में ऑटोमेटिक रूट से सौ फीसदी एफडीआई संबंधी नोट वितरित किया गया है। गुरुवार को हरी झंडी मिलने के बाद इसे संसद में लाया जाएगा।
एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल देश के सभी अस्पतालों और डायग्नोसिस सेंटरों में इस्तेमाल होने वाले 70 प्रतिशत मेडिकल उपकरण विदेश से आयात किए जाते हैं। महंगे दामों में खरीद की वजह से इसका सीधा असर जांच के लिए दी जाने वाली फीस पर पड़ती है। मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था में ज्यादातर डाॅक्टर इलाज से पहले लगभग 5-10 टेस्ट कराने लगे हैं। आम मरीजों को कई बार डाॅक्टरी फीस से ज्यादा राशि मेडिकल टेस्ट के लिए चुकानी होती है। नई प्रस्तावित व्यवस्था से मरीजों को फायदा पहुंचेगा। अधिकारी के अनुसार अभी मेडिकल उपकरणों के मामले फार्मा सेक्टर के तहत आते है। इसकी वजह से सभी तरह के विदेशी निवेश के लिए फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) की अनुमति लेने अनिवार्य है।
नए प्रस्ताव के नियम बनने के बाद मेडिकल उपकरणों के निर्माण के लिए इस बाधा को हटा दिया गया है।
} अभी मेडिकल टेस्ट कराने में 50 से दस हजार रुपए तक का खर्च आता है। सौ एफडीआई आने से मेडिकल टेस्ट में 20-30 प्रतिशत तक राशि कम खर्च करनी पड़ेगी।
} लागत कम होने पर कुल इलाज का खर्च भ