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सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप

7 वर्ष पहले
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लोकसभामें मंगलवार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष ने सरकार पर इस योजना को कमजोर करने का आरोप लगाया तो सत्तापक्ष के सदस्यों की इसकी समीक्षा पर जोर दिया।



मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद शंकर प्रसाद दत्ता ने मनरेगा को निष्प्रभावी बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस योजना को चलाने वाले अधिनियम को सरकार कमजोर करना चाहती है। यह गरीब विरोधी कदम होगा। सरकार ने इस योजना को मात्र 200 जिलों तक सीमित करने का प्रस्ताव किया है जो अन्य जिलों के लिए ठीक नहीं है। गरीब सब जगह हैं और सबकों मदद की जरूरत है। सरकार को बताना चाहिए कि मनेरगा को किस आधार पर सीमित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने का यह प्रमुख साधन है। इसके बेहतर परिणाम सामने आए हैं। यह योजना व्यापक उद्देश्यों के साथ 2005 में शुरू की थी और इसकी दुनिया भर में सराहना हुई है।

कांग्रेस के केएच मुनियप्पा ने मनरेगा को कमजोर करने का विरोध करते हुए कहा कि इस योजना को विश्व बैंक की भी सराहना मिली है। इसको सीमित करने के बजाय व्यापक बनाया जाना चाहिए। इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया जिससे शहरों पर भार कम किया जा सके।

सभी स्कीमों की होली जला दी जाए---

भारतीय जनता पार्टी के हुकुम देव नारायण सिंह यादव ने कहा कि आजादी के बाद लागू की गई सभी योजनाओं की होली जला दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मनरेगा की समीक्षा की जानी चाहिए। यह योजना भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई है। किसानों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह योजना सही नहीं है और इससे विकास कार्य नहीं हो रहे हैं।