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इस्पात शुल्क विवाद में भारत को डब्लूटीओ में राहत

7 वर्ष पहले
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घरेलूइस्पात उद्योग को विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) में बड़ी राहत मिली है। संगठन ने अमेरिका में भारतीय इस्पात उत्पादों पर उच्च शुल्क लगाने को गलत ठहराया है। इसने अपने फैसले में कहा है कि भारतीय इस्पात उत्पादों पर अमेरिका द्वारा शुल्क लगाना सब्सिडी और पारदर्शिता मानकों के लिए हुए समझौते के विपरीत है। हालांकि इसने विवाद निपटारा समिति की कुछ सिफारिशों को खारिज कर दिया है। ये सिफारिशें भारत के पक्ष में थीं। वाणिज्य मंत्रालय ने इसे भारत की बड़ी जीत बताया है। एक बयान में इसने कहा कि इस फैसले से सेल या एनएमडीसी जैसी सरकारी कंपनियों के साथ अन्य घरेलू निर्माताओं को भी फायदा होगा। भारत इस बात पर नजर रखेगा कि अमेरिका डब्लूटीओ के फैसले पर अमल कर रहा है या नहीं।





डब्लूटीओ के अपीलीय निकाय ने कहा है कि अमेरिका को आयात नियमों को संशोधित करना चाहिए। भारत ने वर्ष 2012 में डब्लूटीओ में अमेरिका के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उसके विवाद निपटारा समिति ने इस वर्ष जुलाई में अमेरिका के कदम को गलत ठहराते हुए भारत के पक्ष में फैसला सुनाया था। अमेरिका ने इस निर्णय को अपीलीय निकाय में चुनौती दी थी।

अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने भारत से आयातित हॉट रोल्ड कार्बन स्टील फ्लैट प्रोडक्ट पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाई थी। एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ऐसे उत्पादों पर 300 प्रतिशत शुल्क लगाया है। अमेरिका ने शुल्क का समर्थन करते हुए कहा कि भारत सरकार घरेलू इस्पात उत्पादक कंपनियों को परोक्ष रूप से सब्सिडी देती है।