दादा कीख्वाहिश है पोता बने नेता
नई दिल्ली। एकदुकान के जरिए अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले परशुराम मतदान केन्द्र पर अपने 5 साल के पोते श्रेयश को भी साथ लाए थे। परशुराम का कहना था कि मैंने पोते को मतदान केन्द्र पर इसलिए लाया ताकि वह लोकतंत्र, चुनाव प्रणाली को समझे और आगे चलकर लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिए चुनावी प्रक्रिया में भाग ले।