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अमेरिका में बसे भारतीयों ने मोदी सरकार से मांगे पासपोर्ट
नेशनल ब्यूरो, नई दिल्ली. प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनयिकों से शनिवार को कहा वे ‘पुरानी मानसिकता’ छोड़ें और देश को विश्व में एक संतुलन की शक्ति बनाने की बजाए उसे नेतृत्वकारी भूमिका में लाने की दिशा में काम करें। उन्होंने यहां भारत के लगभग 120 राजनयिक मिशनों के शीर्ष राजनयिकों के चार दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि आज वैश्विक शांति और खुशहाली को लेकर नए ‘खिलाड़ियों’ के साथ ही नए ‘खतरे’ भी हैं और इन चुनौतियों का मुकाबला करने में विश्व की मदद करने के लिए भारत की बड़ी जिम्मेदारी है। मोदी ने कहा, ‘मौजूदा वैश्विक वातावरण एक दुर्लभ अवसर प्रदान कर रहा है, जब विश्व भारत को गले लगाने के लिए उत्सुक है, और भारत विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।’ उन्होंने राजनयिकों से कहा कि इस अनूठे अवसर का उपयोग वे भारत की नेतृत्वकारी स्थिति बनाने के लिए करें, कि विश्व की केवल संतुलनकारी शक्ति बने रहने में। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार मोदी ने राजनयिकों से कहा कि वे ‘पुरानी मानसिकता’ का त्याग करें और बदलती वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप तेजी से अपने को ढालें। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने उन अधिकारियों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने विदेशों में देश की सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। इस चार दिवसीय सम्मेलन के अपने उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री ने राजनयिकों को उन्होंने ‘तेजस्वी, जीवंत और अनुपम’ बताते हुए कहा कि वे भारत की महान विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
संबंधोंपर विशेष जोर : मोदीने भारत के राजनयिक मिशनों से ‘स्वच्छता की संस्कृति’ को आगे बढ़ाने में सहयोग करने तथा ‘डिजिटल डिप्लोमेसी’ में आगे बने रहने के प्रयास करने को कहा। भारत की सर्वोत्तम संस्कृति को विश्व में दर्शाने के लिए डिजिटल लाइब्रेरियां स्थापित करने को कहा। मोदी ने राजनयिकों से विश्व के उन विशिष्ट लोगों से सतत संपर्क में रहने को कहा जो भारत की यात्रा करना चाहते हैं या कर चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘पूरे मानव इतिहास में संबंधों का विशेष महत्व रहा है।’