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इंदिरा गांधी को पता नहीं थे इमरजेंसी के प्रावधान
राष्ट्रपति की किताब से खुलासा
तत्कालीनपीएम इंदिरा गांधी को आपातकाल लागू करने से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के बारे में पता नहीं था। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की किताब, ‘द ड्रैमैटिक डिकेड : इंदिरा गांधी ईयर्स’ में यह खुलासा किया गया है। किताब के मुताबिक, ‘आपातकाल लागू करवाने में सिद्धार्थ शंकर रे (पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री) की अहम भूमिका थी। यह उन्हीं का सुझाव था, जिस पर इंदिरा गांधी ने अमल किया था।’ हालांकि बाद में शाह आयोग के सामने सिद्धार्थ शंकर पलट गए थे। शाह आयोग आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों की जांच के लिए बनाया गया था। राष्ट्रपति की किताब हाल में ही रिलीज हुई है। किताब में मुखर्जी ने बताया है, ‘दिलचस्प बात है कि एक बार आपातकाल लागू हाेने के बाद कई लोग इसे अपना आइडिया बताकर दावा करने लगे। लेकिन बाद में शाह आयोग के सामने सुनवाई में इन्हीं लोगों ने यू-टर्न ले लिया। ये लोग केवल फैसले से अपने को दूर करने लगे बल्कि खुद को निर्दोष बताते हुए पूरा ठीकरा इंदिरा गांधी पर डालने लगे।
सिद्धार्थ शंकर रे भी अपवाद नहीं थे।’
इमरजेंसी,जेपी आंदोलन जैसे विषय उठाए :
मुखर्जी ने 321 पेज की किताब में आपातकाल के अलावा बांग्लादेश की आजादी का मसला उठाया है। जयप्रकाश नारायण का आंदोलन, 1977 की कांग्रेस की हार, कांग्रेस में विभाजन और 1980 में सत्ता में वापसी और उसके बाद के हालात का भी उल्लेख है।
किताब में कहा गया है, ‘शाह आयोग में सुनवाई के दौरान इंदिरा गांधी गहरे लाल रंग की साड़ी पहने हुई थीं। सिद्धार्थ शंकर रे बहुत खुश-खुश उनके पास गए। और बोले-आप आज बहुत सुंदर लग रही हैं। इसके जवाब में इंदिरा गांधी ने रूखा सा जवाब दिया-आपके तमाम प्रयासों के बाद भी।’