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इंदिरा आवास में नहीं बढ़ेगा बिहार का कोटा
{धीरे-धीरे यह योजना होगी समाप्त {पीएम ने सीएम के पत्र का जवाब तक नहीं दिया
{पिछले साल की तुलना में हुई 54 % की कटौती
अरुणअशेष | नई दिल्ली
इंदिराआवास के मामले में बिहार सरकार पत्राचार में नाहक ही समय बर्बाद कर रही है। केंद्र सरकार इस मद में राज्य का कोटा बढ़ाने नहीं जा रही है। वजह कुछ खास नहीं है। नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के सभी लोगों को 2022 तक घर देने का वादा किया है। धीरे-धीरे इंदिरा आवास योजना की पूरी राशि इसी योजना में चली जाएगी। देर-सबेर यह योजना अपने आप खत्म हो जाएगी। केंद्र के पास तर्क भी होगा-जब सबको आवास दिया ही जा रहा है तो इसी काम के लिए अलग से कोई योजना क्यों चले? संभव है कि अगले वित्त वर्ष तक ग्रामीण विकास मिशन में आवास योजना को शामिल कर लिया जाए।
बहरहाल, इंदिरा आवास योजना में कटौती को लेकर बिहार और केंद्र सरकार के बीच खूब लिखा पढ़ी हुई। सीएम जीतन राम मांझी ने पीएम तक को पत्र लिखा। कोटा बढ़ाने की बात तो दूर पीएमओ से उनके पत्र का जवाब भी नहीं आया। कुछ समय के लिए उपेंद्र कुशवाहा केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग के राज्यमंत्री थे। उस दौर में उन्होंने अपनी ओर से भी कोशिश की कि बिहार को पूरा कोटा मिले। विभाग के अफसरों ने भी कोशिश की। लेकिन, अब जबकि वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है, केंद्र की चुप्पी का साफ संकेत यही है कि बिहार को इंदिरा आवास मामले में एक आवास भी अधिक नहीं मिलेगा। यानी जितना कह दिया गया है, उतना ही मिलेगा।
पिछले वित्तीय वर्ष में बिहार को छह लाख छह हजार आवास इकाई बनाने का कोटा दिया गया था। चालू वित्तीय वर्ष में यह घटकर दो लाख 80 हजार हो गया। कुल 54 फीसद की कटौती हुई। पहले राज्य सरकार को लगा कि गणना में तकनीकी गड़़बड़ी के चलते ऐसा हुआ। मगर, अब राज्य सरकार भी मान बैठी है कि अधिक नहीं मिलेगा। हां, राजनीतिक लाभ के लिए बयानबाजी चलती रहेगी। असल में केंद्र सरकार ने आवास आवंटन के पुराने गाइडलाइन में ही बदलाव कर दिया। पहले कच्चा मकान वालों को भी इसके दायरे में रखा गया था। अब इस श्रेणी के लोग दायरे से बाहर है। गाइड लाइन से सिर्फ इसी प्रावधान के हट जाने के नाम पर इतनी बड़ी कटौती हो गई।
^केंद्र सरकार को हमने पत्र लिखा था। जवाब भी आया। लेकिन, कोटा बढ़ाने के बारे में कोई आश्वासन नहीं है। हम तो आग्रह ही कर सकते हैं। आवास आवंटन में कटौती से बिहार क