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केंद्र तैयार करेगा जीएसटी का नया प्रस्ताव

7 वर्ष पहले
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केंद्रसरकार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का नया प्रस्ताव तैयार करेगी। राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की बैठक में इस बात पर सहमति बनी। गुरुवार की सुबह राज्यों के वित्त मंत्रियों ने केंद्र के पुराने प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसके बाद जेटली के साथ उनकी बैठक हुई। सूत्रों के मुताबिक केंद्र पेट्रोलियम और एंट्री टैक्स को जीएसटी से बाहर रखने पर राजी हो गया है। वह मुआवजे को संविधान संशोधन विधेयक में शामिल करने पर भी सहमत है।

इससे पहले एम्पावर्ड कमेटी के चेयरमैन अब्दुल रहीम राथर ने बताया कि समिति मुआवजा, पेट्रोलियम और एंट्री टैक्स के बिना विधेयक का समर्थन नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि केंद्र को राज्यों के विचारों का सम्मान करना चाहिए। पिछली बार हमने जो सिफारिशें की थीं, उसमें से सिर्फ एक को छोड़कर सरकार बाकी सिफारिशों को मानने को राजी नहीं है। हमने कहा था कि जीएसटी का पैसा एक पूल में जाना चाहिए और इसकी राशि राज्यों में बंटनी चाहिए। केंद्र सिर्फ इस पर सहमत हुआ है।

विवाद के विंदु

पेट्रोलियमउत्पाद : केंद्र इन्हें जीएसटी में शामिल करना चाहता है। राज्य इस पर राजी नहीं हैं। केंद्र तंबाकू और शराब पर भी जीएसटी का इच्छुक है।

एंट्री टैक्स : केंद्र इसे भी जीएसटी के दायरे में लाना चाहता है। लेकिन राज्य ऐसा नहीं चाहते।

मुआवजा : राज्य सरकारें संविधान संशोधन विधेयक में इसे शामिल करना चाहती हैं। केंद्र इससे बचना चाहता है। दरअसल केंद्र पर सीएसटी कम करने का मुआवजा 2010-11 से बकाया है। यह रकम 30,000 करोड़ से ज्यादा है। केंद्र राज्यों को यह रकम देने में आनाकानी करता रहा है। बुधवार को जेटली ने इस साल 11,000 करोड़ देने की घोषणा की।