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\"कहीं बच्चों पर जुल्म होता देखें तो आवाज करें बुलंद\'
{बोले सत्यार्थी, बाल श्रम को इतिहास के पन्नों में चले जाना चाहिए
भास्करन्यूज | नई दिल्ली
कहींबच्चे पर जुल्म होता देखें तो आवाज बुलंद करें, चुप रहें। ऐसे जज्बे को वैश्विक आंदोलन के रूप में परिवर्तन करने की अपील रविवार को नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने की। ओस्लो से नोबल शांति पुरस्कार पाकर दिल्ली लौटे सत्यार्थी ने कहा कि वह चाहते हैं बाल श्रम इतिहास के पन्नों में सिमट जाए। बाल श्रम के खिलाफ लंबित कानून को पारित किए जाने की वकालत करते हुए कहा कि अगर कानून पारित नहीं होता तो इतिहास सांसदों को माफ नहीं करेगा। मैं सभी सांसदों और अन्य नेताओं से अपील करूंगा कि वे महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करने में मदद करें अन्यथा इतिहास और भारत के बच्चे उन्हें माफ नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा गांधी जी ने सत्य अहिंसा और शांति को जनांदोलन का रूप दिया था। मेरी अपील है कि करूणा को जनांदोलन बनाएं। आज हमें वैश्विक जज्बे, जुनून और नजरिए को विकसित करने की जरूरत है। बाल श्रम निषेध एवं नियमन संशोधन विधेयक के पारित होने से किसी भी व्यवसाय में 14 साल से कम उम्र के बच्चों के काम करने पर प्रतिबंध होगा और यह कानून बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकारिक कानून-2009 को संगत बनाएगा।
इससे पहले, सत्यार्थी अपनी प|ी सुमेधा के साथ राजघाट स्थित महात्मा गांधी की समाधि पर गए और राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। पूछने पर की वह पुरस्कार राशि का इस्तेमाल किस तरह करेंगे तो सत्यार्थी ने कहा कि इससे पहले जीवन में इतना पैसा कभी नहीं देखा और वह पुरस्कार राशि में मिले पैसे को भारत और विश्व के बच्चों के हित पर खर्च करेंगे। खुद की एनजीओ में भी पुरस्कार का पैसा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि मैं कोई राजनीतिज्ञ नहीं हूं लेकिन भारत पाकिस्तान में स्थायी शांति दोनों देशों की जनता के बीच ज्यादा से ज्यादा संपर्क और आपसी सहयोग से बनेगी।
सुबह दिल्ली पहुंचने पर सत्यार्थी ने ट्विट किया जय हिंद। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। मैं भारत के महान लोकतंत्र का आभारी हूं जो हम सभी को अपनी आवाज उठाने का अवसर देता है। मैं अपनी न्यायपालिका को हृदय की गहराइयों से धन्यवाद देता हूं, जिसने बच्चों के अधिकारों की हिफाजत के लिए ऐतिहासिक फैसले और निर्देश दिए।