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8 हजार रुपए से शुरू किया था बुटिक, अब 65 शहरों में शोरूम
बड़े काम अचानक होते हैं। ऐसी ही कहानी महिलाओं के सलवार-कमीज़ ब्रैंड- बिबा की है। कंपनी की संस्थापक, अब चेयरमैन 72 वर्षीय मीना बिंद्रा ने सोचा नहीं था कि लोन के आठ हजार रुपए से, घर में खोला गया छोटा-सा बुटिक देखते ही देखते करीब 500 करोड़ रु. की कंपनी बन जाएगा। मीना कहती हैं- पति नेवी में थे। बच्चे बड़े हो चुके थे। काफी वक्त खाली बच जाता था। डिज़ाइनिंग का जुनून था, पर कोई प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं थी।
एक दिन पति से कहा- कुछ करना चाहती हूं। डिज़ाइनिंग में। पैसे चाहिए। जवाब आया- पैसे तो नहीं है। सिंडिकेट बैंक से लोन की बात करता हूं और अगले दिन 8 हजार रु. दे दिए। पांच या दस हजार रुपए का लोन क्यों नहीं लिया, इसका रहस्य आज भी नहीं जानती, लेकिन यह 8 हजार रुपए लक्की रहे। कपड़े की समझ थी। ब्लॉक प्रिंटिंग का शौक। अब कोई चाहिए था जो कटिंग, स्टिचिंग और ब्लॉक प्रिंटिंग टेक्निक जानता हो। एक गुजराती लड़का मिला। ब्लॉक प्रिंटिंग में गजब पकड़ थी उसकी। हर दो वर्ष में पति का ट्रांसफर होता था, इसलिए मुंबई बिल्कुल नया था। ज्यादा लोगों को जानती नहीं थी। जिस सरकारी फ्लैट में रहते थे, वे काफी बड़ा था। घर का एक हिस्सा बुटिक में बदला। सभी कस्टमर मीना आंटी कहकर बुलाते, इसलिए बुटिक का कोई नाम रखा ही नहीं। अभी कुछ कस्टमर जुड़े ही थे कि पति का फिर ट्रांसफर हो गया। हमेशा पैसों की तंगी देखी थी, इसलिए अब खुद के पैरों पर खड़ा होना चाहती थी। बच्चों के साथ मुंबई में रहने का फैसला किया। जितना कमाया था उससे छोटा-सा घर खरीदा। उस वक्त ज्यादा सलवार-कमीज़ ब्रैंड नहीं थे। शीतल जैसे ब्रैंड काफी वर्षों बाद आए थे। मीना के कलेक्शन को पहचान मिलने लगी। वे भारतीय महिलाओं के ओरिजिन्ल फिगर के अनुसार सलवार-कमीज बनातीं। कम वक्त में ही उनके बनाए साइज और ब्लॉक प्रिंटिंग ने मुंबई में धूम मचा दी।
होल-सेल के बड़े-बड़े ऑर्डर मिलने लगे। ऑर्डर-बुक और बिल-बुक की मांग उठी, लेकिन बुटिक का तो नाम था ही नहीं। जल्दी ऑर्डर-बुक चाहिए थी। नाम सोचने के लिए दस मिनट थे। पंजाबी होने के कारण बिबा (पंजाब में लड़कियों को प्यार से कहते हैं) शब्द पसंद था। इसी को ब्रैंड नेम बनाया। उनका कलेक्शन शॉपर्स स्टॉप, पैंटालून्स, लाइफस्टाइल में मिलने लगा। मीना बताती हैं- 1997 में सिद्धार्थ ने कंपनी जॉइन की। रेवेन्यू की सारी जिम्मेदारी उसकी थी। 2004 में आॅर्बिट और सीआर2 मॉल में पहला शोरूम खोला गया। 2007 में किशोर बियानी के फ्यूचर वेंचर ने 110 करोड़ रु. में 10 फीसदी स्टेक खरीदे। उस वक्त सेल 30 करोड़ रु. थी, लेकिन जब 2013 में अलग हुए तो सेल 300 करोड़ रु. थी। ब्राइडल कलेक्शन के लिए 2012 में डिज़ाइनर मनीष अरोरा के साथ जुड़ी। हाल ही में डिज़ाइनर रोहित बल के साथ कलेक्शन लॉन्च किया है।
वैसे तो कई टीवी स्टार आते थे, लेकिन अाज भी याद है जब पहली बार शर्मिला टैगोर अपनी बच्चियों के साथ आईं थीं। इसके बाद आशा पारिख और ना-जाने कितनी हस्तियां आने लगीं।