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निशाने पर नक्सलियों की \"अघोषित\' राजधानी

6 वर्ष पहले
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{दक्षिण बस्तर को लेकर रणनीति बनाने पर होगा विचार-विमर्श

रवीन्द्रमिश्र|नई दिल्ली

केंद्र सरकार नक्सलियों के खिलाफ अब सख्त और कड़ा रुख अपनाएगी। इसके लिए सोमवार को नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक अहम बैठक बुलाई गई है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में इस बार मुद्दा छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर में नक्सलियों के गढ़ को तोड़ने पर केन्द्रित रहेगा और मुख्यमंत्रियों से विचार-विमर्श के बाद एक ऐसी रणनीति बनाई जाएगी ताकि अमल प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

गौरतलब है कि दक्षिण बस्तर खासकर अबूझमाड़ छत्तीसगढ़ का एक सघन जंगली इलाका है जहां से नक्सली सरगना सिर्फ अपनी गतिविधियां चलाते हैं बल्कि हथियार बनाने की फैक्ट्री के साथ-साथ अपने कैडर को हथियार चलाने का प्रशिक्षण भी देते हैं। इस गढ़ को खत्म करना सरकार के लिए अभी तक चुनौती रहा है। नतीजतन आए दिन राज्य में लोगों को नक्सली घटनाओं का शिकार होना पड़ रहा है। चूंकि छत्तीसगढ़ के साथ आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार झारखंड का एक रेड कोरिडोर होने से घटनाओं को अंजाम देकर नक्सली आसानी से दूसरे राज्यों में पनाह ले लेते हैं। यही कारण है कि हवाई सर्वेक्षणों अन्य ग्रीन हंट जैसे आपरेशनों के बावजूद उन पर काबू नहीं पाया जा सका है। बताया जा रहा है कि अब नक्सलियों का नया ठिकाना कर्नाटक भी बन गया है।

कई योजनाएं बनीं पर

नहीं हो पाया अमल

दरअसल,छत्तीसगढ़ में नक्सली समस्या के समाधान के लिए कई योजनाएं बनाई गईं, लेकिन उसे पूरी तरह से अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका क्योंकि पहले केंद्र और राज्य में अलग-अलग पार्टियों की सरकार होने से उनमें कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही थी, लेकिन अब दोनों ही सरकारें इस समस्या से निपटने के प्रति गंभीर हो गई हैं। इसी कड़ी में अब केंद्र की निगाह नक्सलियों की अघोषित राजधानी पर भी टिक चुकी है ताकि उनके गढ़ को तोड़ा जा सके। सूत्रों के अनुसार, इस बार बैठक का मुद्दा खासतौर पर दक्षिण बस्तर की रणनीति पर केंद्रित रहेगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए एक रोडमैप बनाया है जिस पर विचार-विमर्श के बाद अब रणनीति को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।