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पूर्व सांसद, मंत्री और विधायकों का साथ भी कांग्रेस को नहीं दिला सका कोई सीट
माकन, हारून, किरण वालिया, महाबल मिश्रा और शर्मिष्ठा मुखर्जी की जमानत जब्त हुई
एसकेगुप्ता | नई दिल्ली
कांग्रेसने पिछले विधानसभा चुनाव में आठ सीटें जीती थीं, इस विधानसभा चुनाव में एक भी नहीं। इसी अंदेशे को भांपकर प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने कांग्रेस उम्मीदवारों की पहली सूची में नाम आने के बाद आला कमान को चुनाव लड़ने की बजाए पार्टी को मजबूत करने के निर्णय से अवगत कराते हुए, अपने को चुनाव लड़ने से दूर रखा। इस बार विधानसभा चुनाव के नतीजे इसलिए भी चौंकाने वाले हैं कि 70 सीटों में से 64 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार तीसरे नंबर पर, दो उम्मीदवार चौथे नंबर पर और चार उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे। इतना ही नहीं 63 उम्मीदवारों की तो जमानत जब्त हो गई। इनमें कांग्रेस सरकार में मंत्री और स्पीकर रहे दिग्गज भी शामिल हैं।
कांग्रेस के कम्युनिकेशन हेड और पार्टी महासचिव अजय माकन को भी चुनाव में करारी हार मिली है। कभी केंद्र में मंत्री और नई दिल्ली सीट से सांसद रहे माकन सदर बाजार विधानसभा चुनाव परिणाम में तीसरे नंबर पर रहे और अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। पूर्व सांसद महाबल मिश्रा द्वारका सीट पर केवल चुनाव हारे बल्कि अपनी जमानत तक जब्त करा बैठे। इनके अलावा दिल्ली सरकार में मंत्री रहीं प्रो. किरण वालिया, हारून यूसुफ भी चुनाव हारने के साथ अपनी जमानत जब्त करा बैठे। पूर्व विधानसभा स्पीकर चौ. प्रेम सिंह और योगानंद शास्त्री को भी इतने वोट नहीं मिल सके कि वह अपनी जमानत बचा पाते। इस बार चुनाव का सबसे चर्चित चेहरा राष्ट्रपति की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी भी हार के साथ अपनी जमानत जब्त करा बैठीं।
कांग्रेस दिग्गजों में पूर्व मंत्री नरेंद्र नाथ, पूर्व विधायक वीर सिंह धींगान, अनिल भारद्वाज, मालाराम गंगवाल, नंदकिशोर गर्ग, ब्रह्मपाल, कंवर करण सिंह, राजेश लिलोठिया की जमानत जब्त हो गई। इनमें से अधिकांश दिग्गज तो दूसरे पायदान को भी नहीं छू सके। कांग्रेस के लिए राहत की बात यह है कि लक्ष्मी नगर से डा. एके वालिया, बादली से देवेंद्र यादव, जंगपुरा से तरविंदर सिंह मारवाह, चांदनी चौक से प्रहलाद सिंह साहनी के अलावा मटिया महल से पांच बार जीत दर्ज करने वाले शोएब इकबाल सहित सात सीटों पर ही अपने उम्मीदवारों की जमानत बचा सकी।
मटिया महल से हर बार चुनाव जीतने वाले शोएब इकबाल के लिए यही कहा जा रहा है कि कांग्रेस में आना उनके लिए शुभ नहीं रहा। क्योंकि निर्दलीय रहे हों या फिर जेडीयू में हर बार उन्होंने इस सीट से जीत का स्वाद चखा था और यह एकमात्र ऐसी सीट थी, जिसपर कांग्रेस और भाजपा आज तक जीत नहीं दर्ज कर सकी थी। लेकिन आम आदमी पार्टी ने इस बार इस मिथक को भी ध्वस्त कर दिया।