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भाजपा को बाहरी संगठनों को कमान देना पड़ा भारी
प्रदेश भाजपा ने चुनाव में हार का ठीकरा संघ पर फोड़ा
शेखरघोष | नई दिल्ली
चुनावमें स्थानीय नेताओं को दरकिनार कर किरण बेदी को सीएम उम्मीदवार घोषित करने विद्रोह दबाने के लिए प्रचार की कमान प्रदेश संगठन से छीन लेना भाजपा को महंगा पड़ा।
चैनलों पर एग्जिट पोल में आप को बढ़त दिखाने पर घबराए पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने आठ फरवरी को एक समीक्षा बैठक बुलाई थी जिनमें प्रदेश प्रभारी प्रभात झा,राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल, प्रदेश संगठन मंत्री विजय शर्मा, प्रवेश वर्मा, उदितराज, मनोज तिवारी, प्रदेश स्वच्छता अभियान कमेटी के प्रभारी सतीश गर्ग चुनाव मीडिया समिति के सदस्य मेवाराम आर्य शामिल थे। नेताओं को पार्टी की हार का अंदेशा हो गया था। उसकी वजह भी सामने चुकी थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रदेश प्रभारी प्रभात झा के निर्देश पर जीत के लिए 70 विस क्षेत्रों के 14 जिला, मंडल, वार्ड समिति से लेकर झुग्गी-झोपडिय़ों में प्रचार का काम देख रहे संगठन के नेताओं से कार्य छीनकर अन्य राज्यों से आए स्वयंसेवकों के कार्यकर्ताओं को दिया गया था। इससे संगठन,कार्यकर्ता लोगों से दूर हो गए। चुनाव वाले दिन जब चुनाव प्रचार देख रहे स्वयं सेवक, संघ के अधिकारियों ने बूथों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने झाड़ू की बाढ़ देखी तो वे घबरा गए और इसकी जानकारी प्रदेश संगठन शीर्ष नेताओं को दी। इसके बाद भाजपा के मंडल अध्यक्षों वार्ड समिति के लोगों ने मोर्चा संभाला और घरों से भाजपा कार्यकर्ताओं को बूथों तक लाए।
क्याथा मामला : चुनावसे 20 दिन पहले जिस तरह से केंद्र ने बेदी को सीएम पद की उम्मीदवार के रूप में घोषित किया इसका कई नेताओं ने विरोध किया। भाजपा के सभी सांसदों समेत प्रदेश के भी सभी नेताओं ने भी सीएम पद के लिए एक-दूसरे का विरोध करने वाले स्थानीय नेताओं ने आपस में मतभेद छोड़ पार्टी को हराने के लिए हाथ मिला लिया। हाइकमान ने एक के बाद एक कई गलती करते हुए जीत आश्वस्त करने के लिए प्रचार अभियान प्रदेश संगठन से छीनकर अन्य राज्यों के मंत्रियों, नेताओं काे दे दी जो क्षेत्र में अनजान थे। ये नेता यहां लोगों से संपर्क नहीं बना पाए जो हार का कारण बना। कार्यकर्ताओं ने हार का ठीकरा शीर्ष नेतृत्व पर फोड़ते हुए कहा कि उन्हें अन्य प्रदेश से आए संघ के कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रचार नहीं करने दिया और चुनाव से दूर रखा।