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अहंकार पड़ा भारी, अब आत्मचिंतन की बारी

6 वर्ष पहले
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भाजपा में हार के कारण को लेकर अंदरखाने उठी आवाज

सुजीतठाकुर | नई दिल्ली

“अहंकारकी हार सदैव ही भयावह और लज्जापूर्ण होती है।’ भाजपा के एक बुजुर्ग नेता ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी की जबरदस्त हार की समीक्षा इसी एक वाक्य में की है। दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी थी। पन्ना प्रमुख से लेकर पार्टी अध्यक्ष, प्रधानमंत्री और मंत्रियों की पूरी फौज तैनात रही। वैज्ञानिक तरीके से चुनाव प्रबंधन किया गया। भाजपा के खिलाफ कोई नकारात्मक माहौल नहीं था। ऐसे में इतनी जबरदस्त हार अनायास नहीं है। इस नेता ने बताया कि मंत्रियों से लेकर संगठन के पदाधिकारियों को आत्म चिंतन करना चाहिए कि जब कुछ भी प्रतिकूल नहीं था तो फिर एकमात्र वजह आचार और व्यवहार पर विचार करने की जरूरत है। भारतीय राजनीति का यह स्वभाव है कि अच्छे कामों के बाद भी जनता अहंकार और बड़बोलेपन को स्वीकार नहीं करती है।

पार्टीका त्वरित आकलन

भाजपाने अपने दयनीय प्रदर्शन के लिए फौरी तौर पर आकलन किया है उनमें प्रमुख रूप से पांच बिंदु निकले हैं।

1.नकारात्मक चुनाव अभियान।

2. चुनाव को मोदी बनाम केजरीवाल बनाने से किया परहेज।

3. कार्यकर्ताओं में नहीं फूंक पाए उत्साह।

4. कांग्रेस और भाजपा विरोधी वोट आप संयोजक अरविंद केजरीवाल के पक्ष में हो गए एकजुट।

5. चुनाव प्रबंधन पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करके बैठ जाना।