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हैपेटाइटिस-सी की सस्ती दवा अब भारत में बनेगी

7 वर्ष पहले
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{अमेरिकी दवा कंपनी जीलीड ने भारतीय दवा कंपनियों से किया करार

प्रदीपसुरीन | नई दिल्ली

देशकेकरोड़ों हैपेटाइटिस-सी के मरीजों के लिए अच्छी खबर है। अमेरिकी दवा कंपनी जीलीड ने अपनी पेटेंट दवा ‘सोफोसबूवीर’ और ‘लेडिपास्वीर’ का जेनेरिक वर्जन बनाने के लिए कुछ भारतीय दवा कंपनियों के साथ समझौता किया है। ‘सोफोसबूवीर’ की एक टैबलेट की कीमत 68 हजार रुपए है।

देश में लगभग दो करोड़ से ज्यादा लोग हैपेटाइटिस-सी से ग्रसित हैं। अभी तक हैपेटाइटिस-सी की कोई कारगर दवा मौजूद नहीं है। सोफोसबूवीर’ और ‘लेडिपास्वीर’ हेपाटाइटिस-सी को 90 फीसदी तक खत्म कर देती हैं। लेकिन इनके 12 हफ्ते के कोर्स का खर्च 51.07 लाख रुपए आता है। वहीं देश में तैयार होने वाली जेनेरिक दवाओं के 12 हफ्ते का कोर्स सिर्फ 6800 रुपए में हो जाएगा। मेडिसिन सैन्स फ्रंटियर (एमएसएफ) के निदेशक रोहित मालपानी ने बताया कि हाल ही में कुछ कंपनियों ने भारत के पेटेंट ऑफिस में जीलीड के साथ मिलकर नए पेटेंट दवाओं के जेनेरिक दवा बनाने के लिए आवेदन किया है।’ अगले कुछ माह में हैपेटाइटिस-सी की सस्ती दवा मरीजों को उपलब्ध होने की उम्मीद है।