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निजी कंपनियों से ही बनवाए जाएंगे युद्धपोत
{रक्षा मंत्रालय ने 25 हजार करोड़ के टेंडर में भाग लेने की सरकारी शिपयार्ड को नहीं दी इजाजत
एजेंसी| नई दिल्ली
नौसेनाकेलिए जमीन और पानी में चलने वाले चार युद्धपोतों का टेंडर सिर्फ निजी कंपनियों को ही मिलेंगे। रक्षा मंत्रालय ने सरकारी शिपयार्ड को 25 हजार करोड़ रुपए वाले इस टेंडर में भाग लेने से रोक दिया है।
रक्षा मंत्रालय ने तय किया है कि इस टेंडर में पिपावाव, एबीजी और एलएंडटी विदेशी साझीदारों के साथ बोली लगा सकते हैं। कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड को इससे बाहर रखा गया है। उसे कहा गया है कि वह 40 हजार टन के स्वदेशी विमानवाही पोत पर काम कर रहा है। इस समय उस पर ही ध्यान दें।
हालांकि, कोचिन शिपयार्ड ने जहाजरानी मंत्रालय के जरिए तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी से संपर्क किया था। तब टेंडर की प्रक्रिया को रोककर एडीशनल सेक्रेटरी के नेतृत्व में एक कमेटी बना दी गई थी। कमेटी ने यूपीए सरकार की आखिरी डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल की फरवरी में हुई बैठक में रिपोर्ट सौंप दी थी।
इसके बाद अब नई सरकार ने तय किया है कि टेंडर को उसके मूल स्वरूप में ही रखा जाए।