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सरकार के गठन को लेकर शीला अपने बयान पर कायम

7 वर्ष पहले
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दिल्लीमें सरकार के गठन पर अपनी टिप्पणी से कांग्रेस के भीतर विरोध से बेपरवाह पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अब भी अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के सत्ता के दावे का समर्थन नहीं करतीं और वह केवल इस मुद्दे पर तथ्यात्मक संवैधानिक प्रावधान बता रही थीं।

शीला ने कहा कि अगर उप-राज्यपाल को लगता है कि भाजपा के पास संख्याबल मौजूद है तो भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता देना गलत नहीं होगा। यह पूछे जाने पर कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी द्वारा समर्थन देने से इनकार के बाद भाजपा सरकार कैसे बना सकती है, शीला ने कहा कि संख्याबल जुटाना भाजपा की जिम्मेदारी है। शीला ने यह भी कहा कि वह भाजपा का समर्थन करने की सोच नहीं सकती और वह केवल नियम बता रही थीं। अगर न्यौता दिया जाता है तो उन्हें विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना पड़ेगा। मैंने तथ्य बताया था। उनकी टिप्पणी पर कांग्रेस की आलोचना के बारे में पूछे जाने पर शीला ने कहा कि \\\"पार्टी ने संभवत वह नहीं समझा जो मैंने कहा। मुझे लगता है कि उन्होंने यह बात नहीं समझी। मैं पूरी तरह से संवैधानिक जरूरत बता रही थी। मैंने कहा था कि भाजपा उस तरह से सरकार बना सकती है जिस तरह से आप ने सरकार बनाई और हमने उन्हें बाहर से समर्थन दिया।\\\' यह पूछे जाने पर कि अगर भाजपा जरूरी संख्याबल नहीं जुटा पाई तो क्या विकल्प होगा, उन्होंने कहा कि उस स्थिति में नये चुनाव कराने होंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह सक्रिय राजनीति में लौटेंगी तो शीला ने सीधा जवाब देने से इंकार कर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि वह दिल्ली की राजनीति में लौटने की इच्छुक नहीं हैं।





उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को कांग्रेस को आगे लेकर जाने के लिए नेतृत्व करना चाहिए।