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महिलाओं की सुरक्षा के प्रयास कितने कारगर: कोर्ट

7 वर्ष पहले
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{हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और पुलिस से मांगी जानकारी

नई दिल्ली। दिल्लीउच्च न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को उसे यह जानकारी देने का निर्देश दिया कि उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए जो उपाय लागू करने का दावा किया है क्या उसके कोई परिणाम सामने आए हैं।

न्यायमूर्ति बदर दुरेज अहमद और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की एक पीठ ने कहा, ‘हम महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर अत्यंत गंभीर हैं। यदि आप उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षित महसूस नहीं करा सकते तो आप ग्रामीण इलाके में महिलाओं की सुरक्षा कैसे करेंगे?’ अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब दिल्ली स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी डीएसएलएसए ने अदालत को बताया कि राजधानी के आठ जिलों के 44 संवेदनशील इलाकों मेें सरकार और पुलिस के उपायों के क्रियान्वयन के बावजूद महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर में कोई कमी नहीं आई है। डीएसएलएसए ने साथ ही यह भी कहा कि उपायों के क्रियान्वयन से ऐसे अपराधों की सूचना अधिक दी जाने लगी है।

दिल्ली सरकार ने कहा डीएसएलएसए को अदालत पूर्व के आदेश के तहत अंतिम रिपोर्ट पेश करनी थी। पीठ ने यद्यपि जवाबों पर असंतुष्ट होकर कहा, ‘हमारा मानना है कि वे इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। ऐसा लगता है कि वे ठीकरा डीएसएलएसए पर फोड़ रहे हैं।’ अदालत ने कहा, ‘गत 15 वर्षों से दिल्ली पुलिस कह रही हैं कि अपराध दर में वृद्धि जानकारी सामने आने में बढ़ोत्तरी होने से हुई है और वे आगे भी ऐसा ही कहते रहेंगे।’ अदालत ने कहा कि ‘अपराध में बढ़ोत्तरी इसलिए होगी क्योंकि आपके उपाय अप्रभावी हैं।’ पीठ ने दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया कि ‘हमारे 16 अप्रैल 2014 के आदेश के तहत उनकी ओर से 44 पुलिस थानों में क्रियान्वित उपायों का क्या कोई परिणाम सामने आए हैं।’ अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर तय की।