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प्रिंसिपल और छात्र तय करेंगे टीचर का परफॉरमेंस
देशभरकेस्कूलों में शिक्षकों द्वारा कैसी पढ़ाई कराई जा रही है, छात्रों को समझाने में शिक्षक सक्षम है और क्या उसके व्यवहार और ज्ञान से छात्र उनके अभिभावक संतुष्ट हैं, इसका मूल्यांकन अब उस संस्थान विशेष के प्रिंसिपल और छात्र करेंगे। शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एनसीईआरटी) ने यह योजना तैयार की है। इसे पिनडिक्स (परफॉरमेंस इंडिकेटर) नाम दिया गया है। योजना के तहत यह भी आकलन किया जाएगा कि शिक्षकों का विषयवार परीक्षा परिणाम किस तरह का है। यही नहीं, इसकी रिपोर्ट प्रिंसिपल या नोडल ऑफिसर को राज्य स्तर के अधिकारी को भेजनी होगी। बाद में इस फीडबैक से भरे जाने वाले डेटा के आधार पर शिक्षक का पिनडिक्स पूरा होगा। हालांकि अपनी परफॉरमेंस के बारे में शिक्षक को अपना मूल्यांकन पेश करने का भी अधिकार होगा। ऐसा इसलिए ताकि संबंधित मामले में तमाम पहलुओं पर गंभीरता से गौर किया जा सके।
एनसीईआरटी पिनडिक्स की सात सदस्यीय कोर कमेटी की चेयरपर्सन एनसीईआरटी निदेशक प्रो. परविन सिंक्लेयर हैं। वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि स्कूलों के लिए तैयार नीतियों को अध्यापक क्रियान्वित करते हैं, लेकिन स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए अध्यापक की शिक्षा का स्तर भी परखना जरूरी है। इस लिहाज से पिनडिक्स योजना नेशनल करिकुल्म फ्रेमवर्क 2005 और शिक्षा के अधिकार कानून-2009 की धारणा को ज्यादा मजबूत करने के लिए है।