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गलत दावा कर ली स्वतंत्रता सेनानी पेंशन लेकिन वारिसों से वसूली जाए:सुप्रीम कोर्ट

7 वर्ष पहले
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13 साल की आयु में 1942 के आंदोलन में शामिल होने का दावा हुआ फुस्स

राजीवसिन्हा | नई दिल्ली

13की उम्र में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले ने दावा कर लंबे समय तक स्वतंत्रता सेनानी पेंशन का सुख भोगा। लेकिन बाद में यह पाया गया है कि वह व्यक्ति 1942 में महज 7-8 साल का था। सुप्रीम कोर्ट ने उस दावे को मानने से इनकार कर दिया है कि 1942 में वह 13 वर्ष का था। उस व्यक्ति की हालांकि अब मौत हो गई है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने रियायत बरतते हुए सरकार को स्वतंत्रता सेनानी पेंशन उसके वारिसों से पेंशन नहीं वसूलने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन और न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि स्वतंत्रता सेनानी पेंशन वास्तव में देश की स्वतंत्रता के लिए त्याग करने वाले लोगों के प्रति आभार बताने का एक तरीका है। हम सदैव इस बात का ध्यान रखते है कि इस तरह के मामले में उदारपूर्ण रवैया अपना जाए जिससे कि सबूतों के अभाव में कोई व्यक्ति पेंशन की सुविधा से महरूम रह जाए। इस बात का खयाल रखा जाता है कि इस तरह के मामलों में निटारा संभावना के आधार पर होना चाहिए और बिना किसी संदेह के साक्ष्य पेश करने का पैमाना नहीं अपनाया जाना चाहिए। हालांकि इस मामले में अदालत ने पाया कि जय किशन सिंह ने उम्र गलत बता पेंशन का लाभ लिया। हालांकि शीर्ष अदालत ने उदारता दिखाते हुए केंद्र सरकार को जयकिशन के वारिसों से पेंशन की रकम वसूलने से मना किया है। पटना हाईकोर्ट के डबल बेंच के आदेश के फैसले को पलटते हुए शीर्ष अदालत ने यह आदेश दिया है।

केंद्र सरकार का कहना था कि 1942 में जयकिशन की उम्र 7-8 साल थी और उसे उस घटना के बारे में कोई जानकारी तक नहीं थी। मेडिकल बोर्ड द्वारा 2001 में जयकिशन की उम्र 73 साल करार दिए जाने को आधार मानते हुए डबल बेंच ने आदेश दिया। हकीकत यह है कि मेडिकल बोर्ड ने उम्र पता लगाने के लिए कोई वैज्ञानिक परीक्षण नहीं किया, सिर्फ उसके शारीरिक ढांचे को देखकर उम्र का निर्धारण किया। केंद्र ने कहा कि आपराधिक मामले में उसने 1977 में अपनी उम्र 40 बताई थी और 1975 में बने मतदाता पहचान पत्र में उसने अपनी उम्र 42 बताई थी। इससे साफ है कि 1942 में उसकी आयु 7-8 वर्ष होगी। लिहाजा स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के उसके दावे पर विश्वास नहीं किया जा सकता।

यहथा मामला

बिहारनिवासी जय