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\"पाकिस्तान में कितने युद्धबंदी ताजा स्थिति बताए सरकार\'

7 वर्ष पहले
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सुप्रीमकोर्टने केंद्र सरकार से पाकिस्तान की जेलों में 43 साल से बंद भारतीय युद्धबंदियों की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी मांगी है। साथ ही इनकी रिहाई के प्रयास करने का भी निर्देश दिया है। वहीं, केंद्र सरकार ने दलील दी कि वह युद्धबंदियों के वापस लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में जाने के पक्ष में नहीं है। भले ही यह मामला गंभीर है। लेकिन इस मामले को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (अंतरराष्ट्रीय न्यायालय) में ले जाएंगे तो पाकिस्तान इसका विरोध करेगा। दोनों देशों के संबंध भी बिगड़ेंगे।

शीर्ष कोर्ट ने मंगलवार को युद्धबंदियों की मौजूदा स्थिति पर विदेश मंत्रालय को छह हफ्ते के भीतर नया हलफनामा पेश करने को कहा। सरकार ने 1985 में बताया था कि 54 भारतीय रक्षाकर्मी पाकिस्तान की जेलों में युद्धबंदी हैं। शेषपेज|4



इन्हें1971 के युद्ध के बाद बंदी बनाया गया था।

पाकिस्तान के उसकी जेलों में एक भी युद्धबंदी नहीं होने संबंधी दावों पर संज्ञान कोर्ट ने संज्ञान लिया। चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला है, लिहाजा हर तरह का विकल्प पर विचार करना चाहिए। सभी विकल्पों पर काम करने से संभव है कि आप सफल हो जाएं।

चीफ जस्टिस लोढ़ा ने कहा, ‘आपके मन में यह शंका क्यों है कि पाकिस्तान आपकी बात नहीं मानेगा। कभी-कभी आप नाकामयाब होते हैं, कभी-कभी कामयाब होते हैं। राज्य ‘रोलर कॉस्टर’ की भांति होते हैं। आप कोशिश तो कीजिए।’

इस पर केंद्र ने कहा कि वह ओपन माइंडेड होकर इस मसले पर विचार कर रहा है। इस मुद्दे को लेकर हमारा रुख तर्कसंगत है लेकिन पाकिस्तान का रवैया नकारात्मक है।

चीफ जस्टिस लोढ़ा ने यह भी कहा, \\\"इस मामले में कुछ तो करना ही होगा। उन्होंने केंद्र से कहा, अच्छे-बुरे का ध्यान रखना आपका काम है। हर मामले में कई तरह के विरोध होते हैं।\\\' अदालत ने कहा, \\\"इस मामले में हमारी भूमिका सीमित है। युद्धबंदी पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं, लिहाजा वह हमारे क्षेत्राधिकार से बाहर है। यह काम सरकार का है।\\\'