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डिम्ट्स ने हड़पा एनजीओ का क्वेश्चन बैंक

7 वर्ष पहले
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{एनजीओ ने दर्जनों बार की शिकायत, लेकिन होती रही है अनदेखी

शेखरघोष | नई दिल्ली

राजधानीमें लर्निंग लाइसेंस जारी करने के लिए इन दिनों डिम्ट्स आवेदकों का जो टेस्ट लेता है, उसका क्वेश्चन बैंक एक एनजीओ ने तैयार किया था। एनजीओ इस क्वेश्चन बैंक का इस्तेमाल करने या इस्तेमाल करने पर उसकी रॉयल्टी देने की मांग कर रहा है लेकिन कई दर्जन बार शिकायत करने पर भी ही परिवहन विभाग और ही डिम्ट्स ने इस पर कोई ध्यान दिया है। ड्राइविंग स्किल इंडिया एंड रिसर्च नामक एनजीओ अब अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।

एनजीओ के अध्यक्ष पवन कुमार ने बताया कि सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पीपीपी मॉडल के तहत हमें लर्निंग लाइसेंस के लिए टेस्ट लेने का जिम्मा दिया था, ताकि विभाग टेस्ट के नतीजे हमारी सिफारिश पर आवेदक को लाइसेंस जारी कर सके। एक वर्ष तक सफलता पूर्वक काम करने के बाद बसंत विहार के एमएलओ ने हमारे लगाए गए सेटअप समेत साफ्टवेयर पर कब्जा कर लिया, जबकि साफ्टवेयर क्वेश्चन बैंक का हमारे पास कॉपी राइट है।

पवन के मुताबिक, उन्हें प्रति लाइसेंस 12 रुपए मिलते थे जबकि उसी काम के लिए परिवहन विभाग डिम्ट्स को प्रति लाइसेंस 25 रुपए का भुगतान कर रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में हर रोज करीब 2200 लर्निंग लाइसेंस जारी होते हैं। पिछले तीन साल में परिवहन विभाग दिल्ली के करदाताओं का दो करोड़ 77 लाख रुपए का भुगतान डिम्ट्स को कर चुका है। इस बारे में जब परिवहन विभाग का पक्ष जानने के लिए आयुक्त ज्ञानेश भारती, स्पेशल कमिश्नर सतीश माथुर से संपर्क करने पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।