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मेडिकल में सिंगल एंट्रेंस टेस्ट को फिर लागू करने की कवायद
{केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन जल्द शुरू कराना चाहते हैं योजना
नेशनलब्यूरो | नई दिल्ली
डॉक्टरबनने का सपना देखने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए दिवाली से पहले स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अच्छी खबर रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) के लिए दोबारा कवायद शुरू कर दी है। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट की ओर से मेडिकल के लिए एक प्रवेश परीक्षा पर रोक लगाने के बाद इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने दैनिक भास्कर की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, ‘पदभार ग्रहण करने के बाद से ही मेडिकल में एक प्रवेश परीक्षा का मामला मेरी प्राथमिकता में रहा है। मेरे निर्देश के बाद मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में नीट को लेकर एक रिव्यू पीटिशन फाइल की है। स्वास्थ्य मंत्रालय एमबीबीएस प्रवेश में एक ही प्रवेश परीक्षा को हर हाल में लागू कराना चाहता है।’ स्वास्थ्य मंत्री ने आगे बताया कि इस मामले में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को भी भरोसे में लेते हुए किसी हाल में लागू करने का प्रयास किया जा रहा है।
मेडिकल शिक्षा से जुड़े एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से दोबारा बातचीत शुरू की गई है। नीट के विरोध में कई राज्यों ने भाषा को बड़ी वजह माना था। इसी तरह कई निजी कॉलेज भी इसे मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर सरकारी हस्तक्षेप मानकर कोर्ट में चले गए थे। यही कारण है कि इस बार बड़ी सावधानी से इसे लागू करने पर विचार हो रहा है। भाषा और निजी कॉलेजों के मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर केंद्र सरकार ने फार्मूला निकाल लिया है।
उल्लेखनीय है कि 2011 में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका के सुनवाई के दौरान मेडिकल में एक प्रवेश परीक्षा पर स्वास्थ्य मंत्रालय और एमसीआई से सुझाव मांगा था। एमसीआई के तत्कालीन संचालक मंडल ने ऐसे व्यवस्था को लागू करने की हामी भरी थी। लेकिन कुछ बड़े राज्यों और निजी मेडिकल कॉलेजों के विरोध के बाद इसे ठंडे बस्ते में डालना पड़ा था।