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राज्यसभा में सरकार ने वापस लिए दो विधेयक

7 वर्ष पहले
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सरकारनेराज्यसभा में कोयला खदान (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक 2000 तथा सरकार द्वारा पोषित बौद्धिक संपदा संरक्षण एवं उपयोग विधेयक 2008 वापस ले लिया। केन्द्रीय विद्युत एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने जब कोयला खदान (राष्ट्रीयकरण ) संशोधन विधेयक 2000 वापस लिया तो माकपा, भाकपा और जद (यू) के सदस्यों ने अपना विरोध जाहिर करते हुए कहा कि सरकार यह विधेयक इसलिए वापस ले रही है कि वह खदानों का निजीकरण करना चाहती है।

माकपा के तपन कुमार सेन ने कहा कि वह इस विधेयक को वापस लेने मात्र का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि जिन उद्देश्यों से उसे वापस लिया जा रहा है वह उसका विरोध कर रहे हैं क्यों कि सरकार इसकी में कोयला खदानों का व्यावसायिक इस्तेमाल करने के लिए उसका निजीकरण करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने कोयला खदानों के संबंध में जो अध्यादेश लाया है उसके स्थान पर जो विधेयक आएगा उससे देश में सरकार खदानों के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर देगी। यह देश हित में नहीं है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी. राजा ने भी उठकर सेन की बातों का समर्थन किया और अपना विरोध दर्ज कराया। इसके बाद जद (यू) के के.सी. त्यागी भी अपनी सीट से उठकर बोले लगे।

उनका कहना था कि एक समय इंदिरा गांधी ने खदानों का राष्ट्रीयकरण किया था तेल का भी राष्ट्रीयकरण किया गया था। लेकिन अब तो कांग्रेस को भी इंदिरा और नेहरू पर नाज नहीं है। अब तो राष्ट्रीयकरण की बात को दकियानूसी तथा पिछड़ापन माना जाता है।