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गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ बनाने की मांग खतरनाक : कांग्रेस

7 वर्ष पहले
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भगवद्गीताको राष्ट्रीय ग्रंथ बनाने की पैरवी कर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज विवादों में घिर गई है। विपक्ष ने इस पर आपत्ति जताई है। आरोप लगाया कि भाजपा अपनी विचारधारा देश पर थोपना चाहती है। ये देश की एकता के लिए खतरनाक है।

सुषमा के बयान पर कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा, \\\"देशवासियों का राष्ट्रीय ग्रंथ संविधान है। ओबामा के हाथ में गीता देने से वह राष्ट्रीय ग्रंथ नहीं हो जाता। खुद ओबामा भी यह पसंद नहीं करेंगे।\\\' भाकपा नेता डी. राजा, जेडीयू नेता अली अनवर के साथ ही आम आदमी पार्टी के मनीष सिसौदिया ने भी आपत्ति जताई। सिसौदिया ने कहा, ‘गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने से उसका ही अपमान होगा। वह इनसे काफी ऊपर है।’

सबसे ज्यादा तीखी प्रतिक्रिया दक्षिण भारतीय खासकर तमिलनाडु की पार्टियों ने दी। डीएमके अध्यक्ष एम. करुणानिधि ने कहा, ‘सुषमा ने मधुमक्खी के छत्ते में कंकड़ मारने का काम किया है।’ भाजपा की सहयोगी पीएमके के नेता एस. रामदौस ने कहा, ‘कुरान और बाइबिल भी गीता जितने ही बड़े धर्मग्रंथ हैं।’

वाइको की एमडीएमके ने भाजपा से रिश्ता तोड़ा

तमिलनाडुमें वाइको की पार्टी एमडीएमके ने भाजपा से रिश्ता तोड़ लिया है। चेन्नई में पार्टी के संसदीय बोर्ड ने यह फैसला लिया। आरोप है कि भाजपा सरकार ने तमिलनाडु के लोगों की जरूरतों का ध्यान नहीं रखा है। लोकसभा चुनावों में वाइको की एमडीएमके, पीएमके और अन्य छोटी पार्टियों ने भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सके थे।