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एप आधारित सेवाओं के लिए बन सकते हैं नए नियम

7 वर्ष पहले
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उबेरटैक्सी दुष्कर्म मामले के बाद सरकार ने देशभर में टैक्सी सेवा के नियमों को लेकर फिर से नए सिरे से विचार करने का फैसला किया है। इसमें सबसे अहम कदम यह होगा कि ऐसी किसी भी टैक्सी सेवा को इजाजत नहीं दी जाएगी जिसमें जीपीएस सिस्टम नहीं होगा। इसके अलावा टैक्सी सेवा के लिए उसके सभी ड्राइवर का पुलिस वैरीफिकेशन कराना जरूरी होगा।

सूत्रों के मुताबिक, चूंकि उबेर का मामला एप आधारित है, ऐसे में यह देखा जा रहा है कि ऐसे एप जिसमें किसी अजनबी से सेवा लेनी हो, खासकर टैक्सी या ऑटो सेवा की स्थिति में तो क्या उनके लिए किसी तरह के रजिस्ट्रेशन या फिर अन्य नियम की जरूरत है। एक अधिकारी ने कहा कि इस मामले में जल्द ही सभी राज्यों से बात की जाएगी। राज्य के परिवहन विभाग से यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि क्या ऐसी सभी टैक्सी सेवा जो एप आधारित है,के लिए जीपीएस जरूरी किया जाए। एप आधारित टैक्सी सेवा के लिए पुलिस सत्यापन सर्टिफिकेट अनिवार्य किए जाने पर भी विचार होगा। संभव है कि इस योजना के तहत देशभर में चलने वाली सभी टैक्सी सेवा के प्रतिनिधियों की सहभागिता वाली किसी कमेटी को लेकर भी राज्यों से चर्चा की जाए। एक अधिकारी ने कहा कि यह सही है कि दुनिया भर में इस तरह की एप आधारित सेवाएं चल रही है। लेकिन सिर्फ इसी आधार पर इन्हें पूरी तरह से अनदेखा नहीं किया जा सकता। यह एक मामला आंख खोलने वाला है। ऐसे में इसको लेकर नियम बनाने की जरूरत तो है ही।

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