एनटीसी नहीं बेचेगी सरकार
सरकारनेशनल टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन (एनटीसी ) को किसी भी हाल में नहीं बेचेगी। बल्कि इसे और मजबूत बनाने के लिए 1,400 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार 15 और टेक्सटाइल पार्क बनाएगी और जल्द ही नई कपड़ा नीति लाएगी। कपड़ा मंत्री संतोष गंगवार ने राज्यसभा में सोमवार को यह जानकारी दी। वे कपड़ा उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) विधि, संशोधन और विधि मान्यकरण विधेयक 2014 पर हुई चर्चा का उत्तर दे रहे थे। राज्यसभा ने इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पिछले सप्ताह पारित कर चुकी थी।
इस तरह से इस विधेयक पर संसद की मुहर लग गई है। गंगवार ने कहा कि फिलहाल एनटीसी की 23 मिलें चल रही हैं। इनमें से पांच संयुक्त उपक्रम लाभ में हैं। जबकि 11 संयुक्त उपक्रम विवादों में हैं। उन्होंने दावा किया कि अगले तीन महीने में कम से कम छह मिलें और मुनाफे में जाएंगी। अभी एनटीसी की 79 मिलें बंद पड़ी हैं। उन्होंने बताया कि एनटीसी की जमीनें बेचकर पहले 6,547 करोड़ रुपए जुटाए गए थे। इसमें से 1,618 करोड़ रुपए मिलों के आधुनिकीकरण पर खर्च किए जा चुके हैं। अब तक आधुनिकीकरण का 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। वीआरएस और कर्मचारियों के कल्याण पर व्यय के बाद 1,480 करोड़ रुपए बचे हुए हैं। इस राशि का उपयोग मिलों के आधुनिकीकरण और कर्मचारियों पर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एनटीसी में 8000 स्थायी और 3,000 अस्थायी कर्मचारी हैं।
गंगवार ने बताया कि सरकार देश में कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार देने वाले कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए नई नीति बना रही है। अभी यह मंत्रालय की वेबसाइट पर है और इस पर संबंध पक्षों से राय मांगी गई है। जल्द ही नई कपड़ा नीति सामने जाएगी।
>उद्योग को बढ़ावा देने वाली नई कपड़ा नीति जल्द
> कपड़ा मंत्री संतोष गंगवार ने राज्यसभा में बताया