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सरकार ने उदार किए कपास निर्यात के नियम

7 वर्ष पहले
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केंद्रसरकार ने कपास निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सोमवार को कॉटन और कॉटन यार्न एक्सपोर्ट के नियम उदार कर दिए। इससे निर्यात अनुबंधों को रजिस्टर कराने की जरूरत खत्म हो गई है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की ओर से जारी नोटिफिकेशन में यह जानकारी दी गई। इस कदम से कपास की घरेलू कीमतें स्थिर करने में भी मदद मिलेगी। कमजोर निर्यात मांग और बम्पर घरेलू उत्पादन के चलते कपास उत्पादक राज्यों में कीमतें गिरकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी ) से भी नीचे गई हैं।

यूएसडीए की रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया का दूसरा बड़ा कपास उत्पादक देश है। मार्केटिंग वर्ष 2014-15 (अगस्त से जुलाई ) में भारत से 76.9 लाख गठानों का निर्यात होने की उम्मीद है। यह पिछले साल के निर्यात की तुलना में 35 फीसदी कम है। निर्यात में यह कमी चीन से कमजोर मांग के कारण है। भारत के लिए से चीन सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। इसके बाद बांग्लादेश और पाकिस्तान का क्रम है।

हाल में कृषि राज्य मंत्री मोहनभाई कुंदरिया ने लोकसभा में बताया था कि महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कपास की कीमतें गिरकर एमएसपी से नीचे गई हैं। केंद्र ने निर्यात के नियम उदार करने से पहले कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) से 11 राज्यों में कपास की खरीद करने को भी कहा था। सीसीआई ने इन राज्यों के 92 जिलों में 341 केंद्रों के माध्यम से खरीद शुरू की है। सीसीआई एमएसपी पर खरीद के लिए सरकार की नोडल एजेंसी है। लंबे रेशे वाले (लांग स्टेपल) कपास का एमएसपी फिलहाल 4,050 रुपए प्रति क्विंटल है।